भारत में पेट्रोल और डीजल के विकल्प के तौर पर इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में टोयोटा अपनी लोकप्रिय MPV Innova Hycross का फ्लेक्स-फ्यूल हाइब्रिड मॉडल पेश करने की तैयारी में है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि वह नवंबर 2026 में टोयोटा की इस कार को लॉन्च करेंगे। यह वाहन 100 प्रतिशत बायोइथेनॉल यानी E100 ईंधन पर चलने में सक्षम होगा।
गडकरी ने 2 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित ENRich 2026 ऊर्जा सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह पिछले करीब डेढ़ साल से टोयोटा की पायलट फ्लेक्स-फ्यूल Innova Hycross का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस कार को भारत में वैकल्पिक ईंधन और हाइब्रिड तकनीक के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
क्या है Toyota Innova Hycross Flex-Fuel की खासियत?
टोयोटा Innova Hycross का फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेट्रोल के साथ इथेनॉल आधारित ईंधन पर भी चलने के लिए तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत 100 प्रतिशत बायोइथेनॉल यानी E100 ईंधन के इस्तेमाल की क्षमता है।
यह एक फ्लेक्स-फ्यूल स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल (FFV-SHEV) तकनीक पर आधारित परियोजना है। इसमें पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर का संयोजन इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य हाइब्रिड कारों की तरह इसमें भी इलेक्ट्रिक मोटर और इंजन मिलकर वाहन को चलाने में मदद करते हैं।
टोयोटा पहले भी Innova Hycross आधारित फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप दिखा चुकी है। इसके पावरट्रेन में संशोधित 2.0 लीटर पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, लॉन्च होने वाले मॉडल की अंतिम तकनीकी जानकारी, पावर, टॉर्क और अन्य स्पेसिफिकेशन कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे।
क्या होती है Flex-Fuel कार और E100 का क्या मतलब है?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसी गाड़ी होती है, जिसे पेट्रोल और अलग-अलग अनुपात वाले इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलाने के लिए डिजाइन किया जाता है। इसमें इंजन और फ्यूल सिस्टम को इस तरह तैयार किया जाता है कि वह सामान्य पेट्रोल के अलावा अधिक मात्रा में इथेनॉल वाले ईंधन का भी इस्तेमाल कर सके।
E100 का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें लगभग 100 प्रतिशत इथेनॉल हो। वहीं E20 में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। E85 में 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है।
ध्यान देने वाली बात है कि सामान्य पेट्रोल कार में सीधे E85 या E100 ईंधन नहीं डाला जा सकता। इसके लिए वाहन का इंजन और ईंधन प्रणाली संबंधित ईंधन के अनुकूल और प्रमाणित होना जरूरी है।
पेट्रोल की जगह इथेनॉल क्यों बढ़ाना चाहती है सरकार?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता के कारण देश को विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। सरकार का मानना है कि इथेनॉल जैसे घरेलू वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
इथेनॉल का उत्पादन गन्ने, मक्का और कुछ कृषि आधारित कच्चे माल से किया जाता है। इससे किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार और आय के अवसर भी बन सकते हैं।
नितिन गडकरी ने ENRich 2026 सम्मेलन में कहा कि भारत का सालाना जीवाश्म ईंधन आयात खर्च करीब 22 लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने वैकल्पिक ईंधन को ऊर्जा सुरक्षा और देश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
क्या इथेनॉल से कार चलाना पेट्रोल से सस्ता पड़ेगा?
इथेनॉल की कीमत प्रति लीटर पेट्रोल से कम हो सकती है, लेकिन केवल ईंधन की कीमत देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कार चलाना कितना सस्ता होगा। इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले प्रति लीटर ऊर्जा कम होती है। इसलिए समान दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन की जरूरत पड़ सकती है।
गडकरी ने सम्मेलन में पेट्रोल और इथेनॉल की कीमतों के आधार पर संभावित बचत का दावा किया था। हालांकि, वास्तविक खर्च वाहन की माइलेज, ईंधन की उपलब्धता, स्थानीय कीमत और ड्राइविंग परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
इसलिए Innova Hycross Flex-Fuel की वास्तविक रनिंग कॉस्ट का आकलन इसके लॉन्च के बाद मिलने वाले आधिकारिक माइलेज और ईंधन कीमतों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
E100 पेट्रोल पंप पर कब और कहां मिलेगा?
फ्लेक्स-फ्यूल कारों की सफलता के लिए सिर्फ वाहन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पेट्रोल पंपों पर संबंधित इथेनॉल मिश्रण की उपलब्धता भी जरूरी है।
केंद्र सरकार E85 ईंधन के लिए शुरुआती स्तर पर दिल्ली-NCR और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में 50 से 100 ईंधन केंद्र शुरू करने की योजना पर काम कर रही है। सरकारी रोडमैप के अनुसार, दिसंबर 2026 तक ऐसे केंद्रों की संख्या करीब 500 और 2027 के अंत तक प्रमुख शहरों में लगभग 5,000 तक पहुंचाने का प्रस्ताव है।
हालांकि, यह योजना E85 ईंधन के लिए है। E100 की व्यापक उपलब्धता और इसकी वितरण व्यवस्था को लेकर अलग से स्पष्टता जरूरी होगी। फिलहाल देश के हर पेट्रोल पंप पर 100 प्रतिशत इथेनॉल उपलब्ध होने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
Maruti WagonR के बाद दूसरी फ्लेक्स-फ्यूल कार होगी Innova?
भारत में पैसेंजर कार सेगमेंट में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को बढ़ावा देने के लिए Maruti Suzuki ने जून 2026 में WagonR Bioflex पेश की थी। यह E20 से E85 तक के इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलने के लिए तैयार की गई है।
अब टोयोटा की Innova Hycross Flex-Fuel इस दिशा में अगला बड़ा कदम हो सकती है। दोनों वाहनों की तकनीक और ईंधन क्षमता अलग है। WagonR Bioflex E20 से E85 तक के मिश्रण के लिए तैयार है, जबकि गडकरी के मुताबिक टोयोटा की नई Innova E100 बायोइथेनॉल पर भी चल सकेगी।
Tata, Mahindra और Hyundai भी ला सकती हैं फ्लेक्स-फ्यूल कारें
नितिन गडकरी ने सम्मेलन में बताया कि टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टोयोटा, सुजुकी और हुंडई जैसी कंपनियां भी फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर काम कर रही हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में 100 प्रतिशत इथेनॉल तक इस्तेमाल करने में सक्षम वाहन बाजार में आ सकते हैं।
हालांकि, इन कंपनियों के सभी मॉडल की लॉन्च तारीख और तकनीकी जानकारी अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है।
क्या Toyota Innova Hycross Flex-Fuel से कम होगा प्रदूषण?
इथेनॉल को घरेलू और कृषि आधारित ईंधन के विकल्प के रूप में देखा जाता है। इसके इस्तेमाल से पेट्रोलियम ईंधन की मांग और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन किसी वाहन के कुल पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन केवल उसके टेलपाइप उत्सर्जन से नहीं किया जा सकता। इथेनॉल के उत्पादन, परिवहन और इस्तेमाल के दौरान होने वाले उत्सर्जन को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
इसलिए Innova Hycross Flex-Fuel को पर्यावरण के लिए कितना फायदेमंद माना जाएगा, यह इसके वास्तविक उत्सर्जन आंकड़ों और इस्तेमाल होने वाले इथेनॉल के स्रोत पर निर्भर करेगा।
लॉन्च के बाद इन बातों पर रहेगी नजर
टोयोटा Innova Hycross Flex-Fuel की लॉन्चिंग के बाद ग्राहकों की नजर इसकी कीमत, माइलेज, इंजन क्षमता, वारंटी और ईंधन उपलब्धता पर रहेगी। सबसे अहम सवाल यह होगा कि E100 ईंधन की आपूर्ति कितनी तेजी से बढ़ती है और इस तकनीक से कार चलाने का वास्तविक खर्च कितना आता है।
फिलहाल नितिन गडकरी की घोषणा के मुताबिक, नवंबर 2026 में इस कार को लॉन्च किए जाने की योजना है। यह कदम भारत में पेट्रोल के विकल्प के रूप में इथेनॉल आधारित वाहनों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।