श्योपुर/भोपाल।
मध्य प्रदेश में चीता पुनर्वास परियोजना को बड़ा झटका देने वाले KNG-22 चीते की मौत के मामले में
पुलिस और वन विभाग की विशेष जांच टीम (STF) को बड़ी सफलता मिली है।
19 महीने के नर चीते को गोली मारने के आरोप में मुरैना जिले के दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया गया है।
आरोपियों की निशानदेही पर शिकार में इस्तेमाल की गई दो नाली वाली भरमार बंदूक भी बरामद कर ली गई है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी जंगल में शिकार करने गए थे।
इसी दौरान उनकी नजर चीते पर पड़ी और उन्होंने गोली चला दी।
गोली लगने से घायल चीते की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
इस मामले ने कूनो नेशनल पार्क की सुरक्षा और जंगलों में वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भगवान सिंह और प्रीतम सिंह गिरफ्तार
STF ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भगवान सिंह और प्रीतम सिंह के रूप में की है।
दोनों मुरैना जिले के पहाड़गढ़ क्षेत्र के नवलपुरा-बेहरारा गांव के निवासी बताए गए हैं।
जांच के दौरान भगवान सिंह को 31 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था।
पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर उसके भाई प्रीतम सिंह को भी हिरासत में लिया गया।
दोनों को घटनास्थल पर ले जाकर घटना की तस्दीक कराई गई।
आरोपियों की निशानदेही पर मुरैना वनमंडल के जंगल से कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल बंदूक बरामद की गई।
24 अक्टूबर को जंगल में चलाई थी गोली

STF की पूछताछ में भगवान सिंह ने कथित तौर पर बताया कि
24 अक्टूबर को वह अपने भाई प्रीतम सिंह के साथ शिकार के इरादे से निकला था।
दोनों श्योपुर जिले के विजयपुर क्षेत्र में नितनवास गांव के पास जंगल में मौजूद थे।
इसी दौरान उन्हें जंगल में चीता दिखाई दिया।
भगवान सिंह ने अपनी लाइसेंसी दो नाली वाली टोपीदार भरमार बंदूक से उस पर गोली चला दी।
इसके बाद दोनों वहां से चले गए।
जांच एजेंसी के अनुसार, चीते पर गोली चलाने की बात पूछताछ में सामने आई है।
बरामद बंदूक को अब मामले के साक्ष्यों के साथ जांचा जाएगा।
25 अक्टूबर को घायल मिला था KNG-22

चीता KNG-22 को 25 अक्टूबर को श्योपुर वनमंडल के कक्ष क्रमांक 748 में घायल अवस्था में पाया गया था।
निगरानी दल ने उसकी हालत गंभीर देखते हुए रेस्क्यू किया।
उसे पहले कूनो नेशनल पार्क ले जाया गया।
बाद में बेहतर इलाज के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा गया।
जांच और सर्जरी के दौरान उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए।
CT स्कैन में आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान सामने आया।
तमाम प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह चीते की मौत हो गई।
मां निरवा से जन्मा था KNG-22 KNG-22 कोई सामान्य वन्यजीव नहीं था।
वह मादा चीता निरवा से भारत में जन्मा नर चीता था।
उसका पूरा नाम Kuno Nirva Gaurav (KNG-22) बताया गया है।
चीता पुनर्वास परियोजना के तहत भारत में जन्मे चीतों की यह पीढ़ी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उसकी मौत से भारत में चीतों की संख्या घटकर 58 रह गई थी।
इनमें कूनो में 52, गांधीसागर में 4 और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 2 चीते शामिल थे।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस

STF ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 और 51 के तहत मामला दर्ज किया है।
धारा 9 वन्यजीवों के शिकार पर रोक लगाती है, जबकि धारा 51 में उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान है।
जांच एजेंसी के अनुसार, अभी तक किसी संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह या अवैध वन्यजीव व्यापार से इनका संबंध सामने नहीं आया है।
छह वनकर्मियों पर भी हो चुकी है कार्रवाई
चीते की मौत के मामले में वन विभाग ने पहले ही छह कर्मचारियों को निलंबित किया था।
इनमें दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और तीन वनरक्षक शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा केंद्र सरकार ने भी मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम भेजी थी।
राज्य सरकार ने पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को मिलाकर चार सदस्यीय STF गठित की थी।
कूनो परियोजना की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
कूनो नेशनल पार्क में चीतों को बसाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
ऐसे में संरक्षित क्षेत्र से बाहर विचरण कर रहे चीते का गोली लगने से घायल होना और
फिर उसकी मौत हो जाना सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती है।
अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि चीता किस स्थान पर गोली का शिकार हुआ,
आरोपियों के पास हथियार कैसे पहुंचा और जंगल में निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई।
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मध्य प्रदेश वन विभाग (MP Forest Department)
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