पंचकूला।
हरियाणा के पंचकूला में स्कूल के भीतर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है।
यहां छह साल की मासूम बच्ची के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट की गई।
आरोप तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले आठ साल के छात्र पर है।
बच्ची को गंभीर चोटें आईं। उसे चंडीगढ़ के PGIMER में भर्ती कराना पड़ा।
करीब 40 घंटे बाद बच्ची को होश आया।
उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।
घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में शिक्षा विभाग ने दो शिक्षिकाओं को निलंबित कर दिया है।
पुलिस ने स्कूल की प्रिंसिपल, क्लास इंचार्ज और चौकीदार के खिलाफ FIR दर्ज की है। हरियाणा सरकार ने जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति भी बनाई है।
पिता के बुलाने का बहाना बनाकर कमरे में ले गया
घटना 28 अक्टूबर की बताई जा रही है।
मामला पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित राजकीय संस्कृति मॉडल स्कूल का है।
परिवार की शिकायत के मुताबिक, तीसरी कक्षा का छात्र बच्ची को बहाने से पहली मंजिल पर ले गया।
उसने बच्ची से कहा कि उसके पिता बुला रहे हैं।
इसके बाद उसे एक खाली कमरे में ले जाया गया।
आरोप है कि वहां छात्र ने बच्ची के साथ मारपीट की।
पुलिस द्वारा जांचे जा रहे CCTV फुटेज में मारपीट की घटना दिखाई देने की बात सामने आई है।
आरोप है कि बच्ची का सिर बेंच पर पटका गया।
ईंट, पत्थर और गमले जैसी वस्तुओं से भी हमला किया गया।
बच्ची के बेहोश होने के बाद भी मारपीट जारी रहने का आरोप है।
घटना के समय कमरे में कोई शिक्षक मौजूद नहीं था।
40 घंटे बाद लौटी मासूम की चेतना
मारपीट में बच्ची के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं।
उसे पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया।
बाद में हालत गंभीर होने पर चंडीगढ़ PGIMER रेफर किया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, बच्ची को करीब 40 घंटे बाद होश आया।
उसकी स्थिति में सुधार बताया गया है।
मीडिया रिपोर्टों में सिर पर टांके और नाक में फ्रैक्चर का भी उल्लेख है।
डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।
परिवार ने बच्ची की सेहत को लेकर चिंता जताई है। साथ ही उसके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की अपील की है।
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दो शिक्षिकाएं सस्पेंड, तीन लोगों पर FIR
घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई की।
दो JBT शिक्षिकाओं सिमरनजीत कौर और पूजा रानी को निलंबित कर दिया गया।
विभाग ने स्कूल में बच्चों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही को कार्रवाई का आधार बनाया है।
दूसरी ओर, पंचकूला पुलिस ने स्कूल की प्रिंसिपल, क्लास इंचार्ज और चौकीदार के खिलाफ FIR दर्ज की है।
पुलिस स्कूल के CCTV फुटेज की जांच कर रही है।
घटना के समय कर्मचारियों की ड्यूटी और उनकी मौजूदगी की भी पड़ताल हो रही है।
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CCTV कैमरे थे, फिर भी कैसे नहीं लगी भनक?
इस घटना ने स्कूल की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
परिवार का आरोप है कि स्कूल में CCTV कैमरे लगे थे।
प्रिंसिपल के कमरे में भी उनकी स्क्रीन उपलब्ध थी। इसके बावजूद घटना समय रहते सामने नहीं आई।
अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कैमरों की निगरानी कौन कर रहा था।
बच्ची के कक्षा से बाहर जाने पर किसी कर्मचारी ने ध्यान क्यों नहीं दिया।
घटना के बाद तत्काल मदद क्यों नहीं मिली?
सरकार ने बनाई पांच सदस्यीय जांच समिति
हरियाणा सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है।
इसकी अध्यक्षता पंचकूला के अतिरिक्त उपायुक्त करेंगे।
समिति में शिक्षा, पुलिस और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।
एक विशेष शिक्षक या बाल मनोवैज्ञानिक भी इसका हिस्सा होंगे।
समिति को सात दिनों में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में कई बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा।
स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी?
घटना के समय शिक्षक कहां तैनात थे?
CCTV कैमरों की निगरानी हो रही थी या नहीं?
बच्ची की सुरक्षा में कहां चूक हुई?
घटना के बाद स्कूल प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
सरकार ने स्कूलों का सुरक्षा ऑडिट कराने की बात भी कही है।
बच्ची के इलाज का खर्च उठाने की घोषणा की गई है।
बाल अधिकार आयोग ने भी लिया संज्ञान
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।
आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
स्कूल से CCTV फुटेज, ड्यूटी रोस्टर और उपस्थिति रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं।
आयोग यह जानना चाहता है कि घटना के समय बच्चों की निगरानी कैसे हो रही थी।
बच्ची घायल हुई तो स्कूल प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
आठ साल के छात्र का होगा मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन
आरोपी छात्र की उम्र आठ साल बताई गई है।
इसलिए उसके मामले में किशोर न्याय कानून के प्रावधान लागू होंगे।
विशेषज्ञों के माध्यम से उसका मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराया जा रहा है।
इसमें उसकी मानसिक स्थिति और घटना को समझने की क्षमता का आकलन होगा।
कानून के अनुसार, सात से बारह वर्ष के बच्चों के मामलों में उनकी समझ और
कृत्य के परिणामों का आकलन महत्वपूर्ण होता है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया इसी के आधार पर तय होगी।
स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
पंचकूला की यह घटना केवल एक स्कूल तक सीमित सवाल नहीं छोड़ती।
यह पूरे शिक्षा तंत्र के सामने चुनौती है।
अभिभावक बच्चों को सुरक्षित माहौल की उम्मीद में स्कूल भेजते हैं।
स्कूलों में शिक्षकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य है।
छोटे बच्चों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
खाली कमरों और सुनसान हिस्सों में निगरानी होनी चाहिए।
CCTV कैमरों का नियमित संचालन भी जरूरी है।
अब जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार है।
उससे स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी और सुरक्षा में हुई चूक सामने आ सकेगी।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता मासूम बच्ची के पूरी तरह स्वस्थ होने की है।