Israel Election Results 2026: नेतन्याहू बहुमत से दूर, गादी आइजनकोट की एंट्री से बदला सियासी समीकरण

इजरायल चुनाव में नेतन्याहू का गठबंधन शुरुआती आंकड़ों में आगे है, लेकिन बहुमत से दूर है। गादी आइजनकोट और अरब पार्टियों का रुख सरकार गठन में अहम हो सकता है।

इजरायल चुनाव परिणाम 2026 में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन शुरुआती मतगणना में आगे है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से पीछे है। गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाला विपक्ष भी अपने दम पर बहुमत हासिल करने की स्थिति में नहीं दिख रहा। ऐसे में इजरायल की अगली सरकार का फैसला छोटे दलों और गठबंधन की बातचीत पर निर्भर हो सकता है।

इजरायल के संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों ने देश की राजनीति में अनिश्चितता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन बढ़त पर दिखाई दिया, लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर है। दूसरी ओर, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाला विपक्ष भी सरकार बनाने की कोशिश में जुटा है।

29 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 93 प्रतिशत मतदान केंद्रों की गिनती पूरी होने के बाद नेतन्याहू के खेमे को 53 सीटें, विपक्षी खेमे को 48 सीटें और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलने का अनुमान था। अंतिम नतीजों में बदलाव संभव है।

सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी

इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सीटों का समर्थन चाहिए।

  • बेंजामिन नेतन्याहू: शुरुआती गिनती में उनका गठबंधन 53 सीटों पर था।
  • गादी आइजनकोट: विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिलने का अनुमान था।
  • अरब पार्टियां: लगभग 19 सीटों के साथ सरकार गठन में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
  • इन आंकड़ों के आधार पर दोनों प्रमुख खेमों को अन्य दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
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गादी आइजनकोट कौन हैं?

गादी आइजनकोट इजरायल के पूर्व सैन्य प्रमुख रह चुके हैं और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने आए हैं। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के दौरान हुई सुरक्षा चूकों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।

चुनाव में सुरक्षा, गाजा युद्ध, सेना में अनिवार्य सेवा से जुड़ी छूट और न्यायिक सुधार जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। इन मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के विचार सरकार गठन की बातचीत को प्रभावित कर सकते हैं।

अरब पार्टियों की भूमिका क्यों अहम है?

शुरुआती चुनावी आंकड़ों में अरब पार्टियों को लगभग 19 सीटें मिलने का अनुमान है। ऐसे में उनका समर्थन किसी गठबंधन को बहुमत के करीब पहुंचा सकता है। हालांकि, इन दलों के साथ गठबंधन को लेकर राजनीतिक मतभेद भी हैं।

आइजनकोट के सामने चुनौती यह होगी कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जरूरी समर्थन जुटा पाते हैं या नहीं। नेतन्याहू का खेमा भी अन्य दलों के साथ बातचीत के जरिए सरकार बनाने की कोशिश कर सकता है।

क्या नेतन्याहू फिर बना पाएंगे सरकार?

शुरुआती नतीजों में नेतन्याहू का गठबंधन सबसे आगे होने के बावजूद बहुमत से पीछे है। इसलिए केवल बढ़त के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि अगली सरकार किसकी बनेगी।

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आधिकारिक नतीजों के बाद इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग राजनीतिक दलों के नेताओं से परामर्श करेंगे। इसके बाद सरकार बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यदि कोई भी पक्ष आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल नहीं होता, तो राजनीतिक गतिरोध और नए चुनाव की संभावना भी बनी रह सकती है।