इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। चुनाव से पहले आए सर्वे में किसी भी प्रमुख राजनीतिक खेमे को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए गठबंधन की भूमिका अहम हो सकती है।
नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच कड़ी चुनौती
इजरायल के चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी के बीच मुकाबला प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। चुनावी अभियान में सुरक्षा, गाजा युद्ध, राष्ट्रीय नेतृत्व और 7 अक्टूबर 2023 के हमलों की जवाबदेही जैसे विषय चर्चा में हैं।
द टाइम्स ऑफ इजरायल की सहयोगी वेबसाइट जमान इजरायल के 23 अक्टूबर को प्रकाशित सर्वे के अनुसार, आइजेनकोट की याशर पार्टी को 23 सीटें मिलने का अनुमान था, जबकि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 21 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी।
बहुमत के आंकड़े से दूर दिख रहे दोनों खेमे
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सीटों का समर्थन चाहिए।
चुनाव से पहले प्रकाशित उक्त सर्वे में नेतन्याहू समर्थक और उनके विरोधी, दोनों प्रमुख खेमों को 51-51 सीटें मिलने का अनुमान था। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को कुल 14 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। ऐसे में सरकार गठन के लिए दूसरे दलों के समर्थन और गठबंधन की बातचीत की अहम भूमिका हो सकती है।
हालांकि, सर्वे के आंकड़े चुनाव के अंतिम नतीजे नहीं होते। मतदाताओं के वास्तविक मतदान और चुनाव के बाद होने वाली राजनीतिक बातचीत से ही सरकार गठन की तस्वीर स्पष्ट होगी।
नेतन्याहू के सामने क्या हैं प्रमुख चुनौतियां?
नेतन्याहू के लिए चुनाव में सुरक्षा नीति, युद्ध से जुड़े फैसले और राजनीतिक सहयोगियों का समर्थन महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। वहीं, विपक्षी खेमे की ओर से सुरक्षा विफलताओं की जवाबदेही और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आइजेनकोट पूर्व सैन्य प्रमुख रह चुके हैं और उनका चुनावी अभियान नेतन्याहू के नेतृत्व को चुनौती दे रहा है। हालांकि, चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए केवल किसी एक पार्टी का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों का समर्थन भी निर्णायक होगा।
क्या फिर बन सकती है गठबंधन की स्थिति?
चुनाव पूर्व सर्वे के मुताबिक, किसी भी प्रमुख खेमे के लिए अपने दम पर बहुमत हासिल करना आसान नहीं दिख रहा था। यदि मतदान के बाद भी कोई गठबंधन 61 सीटों तक नहीं पहुंचता है, तो सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों के बीच बातचीत करनी पड़ सकती है।
इसलिए इजरायल चुनाव 2026 का महत्व केवल नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं है। चुनाव के नतीजे यह भी तय करेंगे कि अगली सरकार किस तरह के राजनीतिक गठबंधन के सहारे बनती है।