पन्ना: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। देवेंद्रनगर-बड़ागांव बांध में प्रतिमा विसर्जन करने पहुंचे पांच युवक गहरे पानी में डूब गए। इस हादसे में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य को बचा लिया गया। घटना के बाद देवेंद्रनगर क्षेत्र में शोक का माहौल है। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया था।
विसर्जन के दौरान कैसे हुआ हादसा?
यह घटना बुधवार, 21 अक्टूबर को पन्ना जिले के देवेंद्रनगर थाना क्षेत्र में स्थित देवेंद्रनगर-बड़ागांव बांध पर हुई। जानकारी के अनुसार, युवक दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन के लिए बांध पहुंचे थे। प्रतिमा को लेकर पानी में उतरने के दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गहरे पानी में चले गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पांचों युवक पानी में डूबने लगे तो मौके पर अफरा-तफरी मच गई। उन्हें बचाने के लिए स्थानीय लोगों और मछुआरों ने पानी में उतरकर प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद पांचों युवकों को बाहर निकाला गया। हालांकि, दो युवकों को बचाया नहीं जा सका। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिमा के नीचे दब जाने के कारण दोनों युवकों को बाहर निकालने में भी परेशानी हुई।
आयुष अग्रवाल और कृष्णा सोनी की मौत
हादसे में जान गंवाने वाले युवकों की पहचान 18 वर्षीय आयुष अग्रवाल और 25 वर्षीय कृष्णा सोनी के रूप में हुई है। दोनों देवेंद्रनगर के वार्ड नंबर 12 के निवासी थे। घटना की खबर मिलते ही उनके परिवारों में मातम छा गया।
वहीं, हादसे में साहिल तिवारी, हरिओम द्विवेदी और करण सोनी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। शुरुआती उपचार के बाद तीनों को बेहतर इलाज के लिए पन्ना जिला अस्पताल भेजे जाने की खबर है। इस घटना ने त्योहार के माहौल को गहरे दुख में बदल दिया।
मौके पर पहुंचा प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू और तहसीलदार सुमित तिवारी ने घटनास्थल का जायजा लिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, युवकों के पैर फिसलने या अनजाने में गहरे पानी में चले जाने से हादसा हुआ।
घटना के बाद विसर्जन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि मौके पर गोताखोरों की उपलब्धता नहीं थी और स्थानीय लोगों व मछुआरों को बचाव कार्य करना पड़ा। हालांकि, प्रशासनिक पक्ष के अनुसार विसर्जन स्थल पर पुलिस, राजस्व विभाग और नगर परिषद की टीम मौजूद थी। गोताखोरों की तैनाती को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। रिपोर्ट में भी हादसे और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का उल्लेख किया गया है।
इस घटना ने एक बार फिर प्रतिमा विसर्जन के दौरान सावधानी और सुरक्षा इंतजामों की अहमियत को सामने ला दिया है। गहरे पानी में उतरने, फिसलन और भारी प्रतिमाओं के कारण ऐसे आयोजनों में जोखिम बढ़ सकता है। सुरक्षित विसर्जन स्थलों, प्रशिक्षित बचावकर्मियों और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।