नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन और पार्टी के दो प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर अहम बयान दिया है। दिपके ने कहा कि आंदोलन से जुड़े बड़े फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका लेते थे और वह उनके निर्देशों का पालन करते थे। उन्होंने दोनों नेताओं को अपना भाई और परिवार बताते हुए कहा कि उनके जेल में रहने से उन्हें भावनात्मक रूप से काफी असर पड़ा है।
दिपके ने यह भी स्पष्ट किया कि दिवाली तक CJP की ओर से किसी नए प्रदर्शन की योजना नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे कुछ दिन आंदोलन से विराम लेकर अपने परिवार और करीबियों के साथ समय बिताएं।
सौरव दास और आशुतोष रांका को बताया आंदोलन का नेतृत्वकर्ता
अभिजीत दिपके ने दशहरा के मौके पर जारी अपने वीडियो संदेश में आंदोलन के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बाहर से भले ही ऐसा लगता हो कि आंदोलन का नेतृत्व वह कर रहे थे, लेकिन कई महत्वपूर्ण फैसले दोनों सह-संयोजक लेते थे।
दिपके के मुताबिक, सौरव और आशुतोष उन्हें बताते थे कि अगले दिन कहां जाना है और आगे क्या करना है। उन्होंने दोनों की निर्णय लेने की क्षमता की भी तारीफ की। दिपके ने कहा कि ये दोनों उनके लिए केवल राजनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि भाई और परिवार की तरह हैं।
उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि तीनों का एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप भी था, जिसमें वे मीम्स साझा करते थे। दिपके ने कहा कि वह आज भी उस ग्रुप को खोलते हैं तो उन्हें ऐसा महसूस होता है, मानो दोनों अब भी वहीं मौजूद हों।
दिवाली तक CJP का कोई प्रदर्शन नहीं
दिपके ने पार्टी समर्थकों से दिवाली तक किसी नए प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी करने के बजाय परिवार के साथ समय बिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों की घटनाओं से आंदोलन में शामिल कार्यकर्ताओं के साथ-साथ उनके परिवारों को भी परेशानी और चिंता का सामना करना पड़ा है।
उनके मुताबिक, आंदोलन में भाग लेने का फैसला कार्यकर्ताओं का था, लेकिन इसके परिणाम उनके परिवारों को भी झेलने पड़ रहे हैं। इसलिए त्योहार के समय अपनों के साथ रहना जरूरी है।
दिपके ने समर्थकों को यह संदेश भी दिया कि आंदोलन के दौरान सामने आई मुश्किलों के बावजूद उन्हें एक-दूसरे के प्रति प्यार, करुणा और संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए।
जेल में बंद हैं सौरव दास और आशुतोष रांका
CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका दिल्ली में प्रदर्शन से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों 13 अक्टूबर से हिरासत में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने जंतर-मंतर के बंद गेट को पार करके प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया था। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटाने की जानकारी दी थी।
इस पूरे घटनाक्रम का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के आंदोलन से है। पार्टी चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही थी।
दोनों नेताओं की हिरासत के बीच CJP ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख भी किया है। पार्टी ने उनकी हिरासत को चुनौती देते हुए मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की है।
गांधीवादी विचारों और अहिंसा पर दिया जोर
अपने वीडियो संदेश में अभिजीत दिपके ने CJP के आंदोलन को शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलने वाला आंदोलन बताया। उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका के रवैये की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से की।
दिपके ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य नफरत के खिलाफ लड़ना है और इसके लिए खुद भी नफरत से दूर रहना जरूरी है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे गुस्से के बजाय प्रेम, करुणा और आपसी सहयोग को अपनी ताकत बनाएं।
फिलहाल दिवाली तक CJP के प्रदर्शनों पर विराम रखने की बात कही गई है। सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है। ऐसे में आगे आंदोलन की रणनीति क्या होगी, यह आने वाले घटनाक्रम और दोनों नेताओं से जुड़े मामले की स्थिति पर निर्भर करेगा।