MP में ₹1 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी! 7 जिलों में बनेंगे इंडस्ट्रियल हब

मोहन कैबिनेट ने जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए ₹100 करोड़ की शुरुआती पूंजी मंजूर की। पहले चरण में 10 हजार एकड़ में औद्योगिक हब बनेंगे।

भोपाल(9826019364)।

मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर के विकास के लिए नई कंपनी बनाई जाएगी।

राज्य सरकार शुरुआती पूंजी के रूप में ₹100 करोड़ देगी।

योजना के पहले चरण में 10 हजार एकड़ क्षेत्र में 3 से 5 औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे।

मार्च 2028 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य है।

सरकार को उम्मीद है कि इससे एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे।

गुरुवार को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कंपनी गठन प्रस्ताव को ​मंजूरी मिली।

बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने की।

निवेशकों को एक जगह मिलेंगी सभी सुविधाएं

कॉरिडोर में प्लग एंड प्ले मॉडल पर औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे।

यहां उद्योग शुरू करने के लिए जमीन, बिजली, पानी, सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

साथ ही श्रमिकों के लिए आवास, अस्पताल, स्कूल और कौशल विकास केंद्र भी बनाए जाएंगे।

सात जिलों में खुलेंगे विकास के नए रास्ते

इस परियोजना में जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर शामिल हैं।

यहां मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, रक्षा, एयरोस्पेस, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स,

आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने की योजना है।

तीन साल में ₹3 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

कैबिनेट प्रेजेंटेशन के अनुसार, अगले तीन साल में ₹3 लाख करोड़ से अधिक निवेश

आकर्षित करने और छह लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना है।

हालांकि, ये निर्धारित लक्ष्य हैं। इनकी वास्तविक उपलब्धि निवेश और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

30 दिन में कंपनी, छह माह में लैंड बैंक

सरकार ने परियोजना के लिए समयसीमा भी तय की है।

अगले 30 दिन में कंपनी गठित करने की योजना है।

छह महीने में जीआईएस मैपिंग और लैंड बैंक तैयार किया जाएगा।

इसके बाद एक साल में प्राथमिक औद्योगिक हब का मास्टर प्लान और

डीपीआर तैयार कर भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने का लक्ष्य है।

नई कंपनी का काम जमीन, औद्योगिक सुविधाओं और निवेश की व्यवस्था करना होगा।

सड़क निर्माण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों के पास रहेगी।

वहीं, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) अपने मौजूदा कार्य जारी रखेगा।

भूमि अधिग्रहण में सहमति और मुआवजे पर जोर

परियोजना के लिए पहले सरकारी जमीन को प्राथमिकता दी जाएगी।

जरूरत पड़ने पर निजी भूमि सहमति से खरीदी जाएगी या कानूनी प्रक्रिया

के तहत अधिग्रहित की जाएगी।

प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास का लाभ देने की बात कही गई है।

स्कूलों के परिवहन के लिए ₹241 करोड़

कैबिनेट ने विद्यालयों में परिवहन व्यवस्था मजबूत करने के लिए लगभग

₹241 करोड़ की योजना को भी मंजूरी दी है।

अब बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी जिला स्तर पर कलेक्टरों को सौंपी जाएगी।

इसका उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों के साथ ओबीसी और

अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।

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