महिला भी हो सकती है गैंगरेप की आरोपी,दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि साझा मंशा या सहयोग के आधार पर महिला पर भी सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया जा सकता है। जानिए मामले की पूरी जानकारी।

नई दिल्ली।

सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में केवल शारीरिक रूप से अपराध करने वाला ही जिम्मेदार नहीं होगा।

अपराध में साझा मंशा रखने और सहयोग करने वाले व्यक्ति पर भी आरोप लगाया जा सकता है।

इसमें महिला भी शामिल है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में यह टिप्पणी की है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सामूहिक दुष्कर्म के मामले में

आरोपी का पुरुष होना या खुद दुष्कर्म करना जरूरी नहीं है।

न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने कहा कि कानून में इस्तेमाल किया गया

‘व्यक्ति’ शब्द केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है।

इसलिए, यदि कोई महिला सामूहिक दुष्कर्म की साझा मंशा से काम करती है

या अपराध को अंजाम देने में सहयोग करती है,

तो उस पर भी आरोप लगाया जा सकता है।

नाबालिग बेटी से जुड़ा है मामला

यह मामला एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण के आरोपों से जुड़ा है।

आरोप है कि उसकी मां ने उसे धमकाया और दूसरे आरोपी के साथ

यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया।

ये घटनाएं दिसंबर 2023 से जुलाई 2024 के बीच कई बार हुईं।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि यौन हमले के दौरान उसकी मां कमरे में मौजूद रहती थी।

इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में दलील दी कि भारतीय न्याय संहिता (BNS)

में दुष्कर्म की परिभाषा पुरुष को अपराध करने वाला बताती है।

इसलिए, उसके खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

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अदालत ने क्यों खारिज की दलील?

हाईकोर्ट ने महिला की इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376D और

भारतीय न्याय संहिता की धारा 70 का उल्लेख किया।

ये प्रावधान सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित हैं।

अदालत के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति साझा मंशा

के तहत सामूहिक दुष्कर्म में शामिल होता है,

तो उसे भी कानून के तहत जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

इसके लिए उसका खुद शारीरिक रूप से दुष्कर्म करना जरूरी नहीं है।

अपराध को अंजाम देने में उसकी भूमिका और साझा मंशा महत्वपूर्ण होगी।

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अदालत ने फैसले की सीमा भी स्पष्ट की

हालांकि, हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतर भी स्पष्ट किया।

अदालत ने इस फैसले में यह तय नहीं किया कि मौजूदा कानून के तहत

कोई महिला अपने दम पर दुष्कर्म का अपराध कर सकती है या नहीं।

उसके सामने सीमित सवाल यह था कि क्या किसी महिला पर

सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया जा सकता है।

इस तरह, अदालत की टिप्पणी का केंद्र महिला की भूमिका, साझा मंशा और अपराध में सहयोग था।

हालांकि, आरोप लगाया जाना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है।

मामले में अंतिम जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

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  • सामूहिक दुष्कर्म कानून (Gang Rape Law)

  • भारतीय न्याय संहिता धारा 70 (BNS Section 70)

  • IPC धारा 376D (IPC Section 376D)

  • नाबालिग से यौन शोषण (Sexual Abuse of Minor)

  • साझा मंशा और आपराधिक जिम्मेदारी (Common Intention and Criminal Liability)

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