एमपी के MSME मंत्री चेतन्य काश्यप की दिवंगत मां पंचतत्व में विलीन,अनेक राजनीतिक हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

रतलाम में तेजकुंवरबाई काश्यप पंचतत्व में विलीन हुईं। मंत्री चेतन्य काश्यप ने मुखाग्नि दी। जानिए उनके संघर्ष, धर्म और समाजसेवा की कहानी।

रतलाम।
एक मां, जिसने कम उम्र में पति को खोने के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाली।

जीवन की कठिनाइयों के बीच धर्म, सेवा और सामाजिक सरोकारों को अपना आधार बनाया।

सोमवार को उसी मां को उनके बेटे और मध्यप्रदेश के एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने उन्हें मुखाग्नि दी।

मंत्री चेतन्य काश्यप की मां तेजकुंवरबाई काश्यप पंचतत्व में विलीन हो गईं।

सोमवार सुबह 10:30 बजे रतलाम के स्टेशन रोड स्थित उनके निवास ‘वीसाजी मेंशन’ से अंतिम यात्रा निकली।

शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई अंतिम यात्रा त्रिवेणी मुक्तिधाम पहुंची।

यहां मंत्री चेतन्य काश्यप ने अपनी मां को मुखाग्नि दी।

तेजकुंवरबाई के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।

राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

तेजकुंवरबाई के अंतिम दर्शन के लिए मध्यप्रदेश की मंत्री निर्मला भूरिया, पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी

सहित भाजपा के कई नेता और पदाधिकारी पहुंचे। पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे।

उनके निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल,

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भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल और गृह राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने शोक व्यक्त किया।

सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई।

21 साल की उम्र में उठाया परिवार का भार

तेजकुंवरबाई काश्यप का जीवन संघर्ष, आस्था और जिम्मेदारियों की कहानी रहा।

उनका जन्म 17 मार्च 1943 को मध्यप्रदेश के कुक्षी में हुआ था।

उनके पिता स्वर्गीय चंपालाल खूंटवाला ने पालिताना तीर्थ में त्रिस्तुतिक

जैन समाज की पहली धर्मशाला ‘चंपा निवास’ का निर्माण कराया था।

वर्ष 1958 में उनका विवाह रतलाम के अशोक कुमार काश्यप से हुआ।

लेकिन वर्ष 1964 में पति के आकस्मिक निधन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

उस समय उनकी उम्र महज 21 वर्ष थी।

इतनी कम उम्र में उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली।

कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पारिवारिक दायित्वों के साथ धार्मिक गतिविधियों

और साधना के प्रति अपनी आस्था बनाए रखी।

उनका जीवन परिवार तक सीमित नहीं रहा।

जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक गतिविधियों में भी उनकी भागीदारी रही।

100 जरूरतमंद परिवारों को बसाने में निभाई भूमिका

तेजकुंवरबाई काश्यप का योगदान सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी रहा।

वर्ष 2005 में चेतन्य काश्यप फाउंडेशन ने रतलाम में ‘अहिंसा ग्राम’ की स्थापना की थी।

यहां 100 जरूरतमंद परिवारों को बसाने और उनके सामाजिक एवं

संस्कार निर्माण से जुड़े प्रयासों में तेजकुंवरबाई ने सक्रिय भूमिका निभाई।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों में भी उनका योगदान रहा।

उन्होंने सिलाई, बुनाई और कढ़ाई जैसे कौशलों के प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग किया।

इन प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना

और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था।

स्वसहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

भी उनके सामाजिक सरोकारों का हिस्सा रही।

धार्मिक आस्था के साथ जरूरतमंद परिवारों की सहायता करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष था।

मुंबई में हुआ था निधन

तेजकुंवरबाई काश्यप का रविवार को 83 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया था।

वह पिछले कई दिनों से बीमार थीं।

उनके निधन की खबर से काश्यप परिवार और उनसे जुड़े लोगों में शोक छा गया।

सोमवार को अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

त्रिवेणी मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के साथ एक ऐसा जीवन विदा हो गया,

जिसमें पारिवारिक संघर्ष, धार्मिक आस्था और समाजसेवा के कई अध्याय जुड़े थे।