नई दिल्ली।
CJP के नेता अभिजीत दीपके की हिरासत को लेकर दिल्ली पुलिस और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच विवाद बढ़ गया है।
दिल्ली पुलिस ने रविवार को दीपके की हिरासत का वीडियो जारी किया।
पुलिस ने CJP के आरोपों को गलत बताया।
वहीं, संगठन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के
इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन हुए।
पुलिस ने करीब 100 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही।
कई स्थानों पर पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए।
पुलिस ने उजागर किया CJP का झूठ
#WATCH | Delhi | DCP Neha Yadav says, “As soon as the Delhi Police received information about the passing away of Cockroach Janta Party (CJP) Founder Abhijeet Dipke’s grandmother, officers approached him to convey this sad news and offered all possible assistance. They sensitively asked if he needed help with flights, phone calls, or anything else. They repeatedly asked if he wished to speak to his parents, but he declined…Regarding CJP, their past conduct showed a failure to adhere to previously given undertakings and local directives. When permission was granted previously, they did not abide by the law; the crowd they mobilized engaged in heavy stone-pelting, arson, and violence, causing significant damage to public property. Permission for the proposed sit-in protest at Janpath was denied due to the failure to follow prescribed procedures, a history of non-compliance with laws and guidelines, and the prevailing security and law-and-order situation. To ensure Delhi’s security and protect the lives and property of its citizens, Section 133 BNSS was imposed in several areas of the city, prohibiting any form of gathering or protest. Abhijeet Dipke and two of their associates were detained on October 10 in connection with a call for a protest at Janpath as permission for the demonstration had not been granted”
— ANI (@ANI) October 11, 2026
CJP ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि दादी के निधन की खबर मिलने के बाद
अभिजीत दीपके ने अपने चचेरे भाई से बात कराने की गुहार लगाई थी।
संगठन के मुताबिक, उनकी इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया।
दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया। पुलिस का कहना है कि निधन की सूचना
मिलने के बाद दीपके को हरसंभव सहायता देने की पेशकश की गई थी।
उनसे फोन कॉल, यात्रा और दूसरी जरूरतों के बारे में पूछा गया था।
पुलिस के अनुसार, दीपके ने अपने माता-पिता से बात करने से इनकार कर दिया था।
अधिकारियों का दावा है कि उन्हें सोचने के लिए समय भी दिया गया
और दोबारा सहायता की पेशकश की गई।
पुलिस ने इसी घटनाक्रम से जुड़ा वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा।
इस मामले में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
करीब 23 घंटे बाद रिहा हुए दीपके
अभिजीत दीपके, अशुतोष रांका और सौरव दास को करीब
23 घंटे हिरासत में रखने के बाद रविवार सुबह 10 बजे रिहा कर दिया गया।
दीपके शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। रिपोर्ट के अनुसार,
विमान के उतरने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था।
रिहाई के बाद दीपके ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है,
जिसमें प्रदर्शन नहीं करने की शर्त हो।
उन्होंने दोबारा सड़कों पर उतरने की बात भी कही।
#Watch | A video from October 10 protest at Raj Ghat shows a protester being pinned down, with a female police personnel holding the protester by the throat.
Video: Special arrangements https://t.co/BHsVwhcSh5— The Hindu (@the_hindu) October 11, 2026
मुंबई में भी CJP समर्थकों पर कार्रवाई

दिल्ली के साथ मुंबई में भी CJP समर्थकों का प्रदर्शन जारी रहा।
दादर के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के लिए पहुंचे कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया।
इससे पहले शनिवार को मुंबई के अलग-अलग इलाकों में करीब 600 लोगों
को बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी।
SIR विवाद के बीच बढ़ा टकराव

CJP और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
उनका विरोध विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे से जुड़ा है।
दिल्ली में लगातार दूसरे दिन हुए प्रदर्शनों से साफ है कि यह विवाद अभी थमा नहीं है।
एक ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं,
वहीं पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई कर रही है।
रिहाई के वक्त अकेले पड़े सीजेपी नेता

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन सबसे बड़े नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका
और सौरभ दास को आज जब छोड़ा गया तो दिल्ली की एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट
ने उन्हें शांति बनाए रखने का आदेश दिया है।
इन तीनों से 50,000 के जमानती बॉन्ड और एक साल तक शांति व्यवस्था रखने वाले बॉन्ड भरवाए गए।
ये तीनों जब सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जेल से बाहर निकले
तो उनका स्वागत करने के लिए वहां कोई मौजूद नहीं था।
पुलिस स्टेशन से बिल्कुल अकेले निकले
बताया जाता है कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ये तीनों नेता पुलिस स्टेशन से बिल्कुल अकेले निकले।
पार्टी की तरफ से किए गए बड़े-बड़े दावों के बावजूद नेताओं की रिहाई के समय
उनका स्वागत करने के लिए स्टेशन पर एक भी समर्थक या अनुयायी नहीं पहुंचा।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि इस कानूनी कार्रवाई से
यह स्पष्ट संदेश जाता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
रिहाई की शर्तें बनीं कारण?
रिहाई की शर्तों के तहत इन नेताओं को पूरी तरह से शांति और
कानून-व्यवस्था बनाए रखनी होगी। कोर्ट ने उन्हें सख्त आदेश दिया है कि
वे कोई भी सार्वजनिक सभा न करें और न ही अशांति फैलाएं।
इस बॉन्ड का उल्लंघन करने पर उन्हें तुरंत दोबारा गिरफ्तार किया जा सकता है
और उन पर गंभीर आपराधिक आरोप लगाए जा सकते हैं।
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