जंतर-मंतर मार्च से दिल्ली में तनाव, केजरीवाल-ममता समेत 1,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर SIR के विरोध में प्रदर्शन के दौरान केजरीवाल, ममता बनर्जी समेत कई नेता हिरासत में लिए गए। अभिजीत दीपके की दादी का भी निधन।

नई दिल्ली |

वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान तनाव की स्थिति बन गई।

पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया।

अलग-अलग स्थानों से 1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को भी कस्टडी में लिए जाने की खबर है।

कई जगह बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश

प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ते समय कई जगह बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की।

पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी के सिर में चोट लग गई।

आकाशवाणी भवन के पास कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर पुलिस पर पत्थर फेंके।

इस घटना में दो पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई।

प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं,

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाना है।

जंतर-मंतर मार्च: पुलिस कार्रवाई और हिरासत की बड़ी बातें

1. कई इलाकों में प्रदर्शन, पुलिस ने की कार्रवाई

जंतर-मंतर के अलावा कनॉट प्लेस, मिंटो ब्रिज और मध्य दिल्ली के अन्य इलाकों में भी प्रदर्शनकारियों को रोका गया।

पुलिस की कार्रवाई के बीच कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

2. अभिजीत दीपके को विमान में ही हिरासत में लिया

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके दिल्ली पहुंचने के बाद विमान

में ही पुलिस हिरासत में ले लिए गए। उनके साथ सौरव दास और आशुतोष रांका को भी हिरासत में लिया गया।

दीपके ने पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में आंदोलन की कमान अजिंक्य शिंदे को सौंपने की बात कही।

3. आंदोलन के बीच दीपके की दादी का निधन

प्रदर्शन के दिन अभिजीत दीपके के परिवार से दुखद खबर आई।

उनकी दादी सावित्रीबाई शंकर दीपके का महाराष्ट्र के हिंगोली जिले

स्थित पैतृक गांव संतुक पिंपरी में निधन हो गया। उनकी उम्र 85 वर्ष बताई गई है।

परिवार के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से बीमार थीं।

दीपके के माता-पिता गांव के लिए रवाना हुए।

दीपके के अंतिम संस्कार में शामिल होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।

4. मां ने पुलिस कार्रवाई पर जताई नाराजगी

अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके ने अपने बेटे के साथ हुई कार्रवाई पर दुख जताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनका बेटा देश के लिए काम कर रहा है

और सरकार उसके साथ गलत व्यवहार कर रही है।

उन्होंने कहा कि आंबेडकरवादी लोग सरकार से उसके कामकाज पर जवाब मांगेंगे।

5. ज्यां द्रेज ने मताधिकार को लेकर उठाए सवाल

अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने सुरक्षा व्यवस्था और भारी पुलिस बल की तैनाती पर सवाल उठाए।

उनका कहना था कि इससे लोगों के लिए प्रदर्शन में शामिल होना मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से लोगों के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

यह प्रदर्शनकारियों का आरोप है, जिसकी जांच और चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

6. वामपंथी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी धरपकड़

प्रदर्शन में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और दीपांकर भट्टाचार्य

सहित कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल होने पहुंचे।

माकपा नेता वृंदा करात और एमए बेबी समेत अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की खबर है।

CJI सूर्यकांत के दखल के बाद हिरासत में लिए गए वकील रिहा

CJI सूर्यकांत ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए

वकीलों को उनके दखल के बाद रिहा कर दिया गया।

उन्होंने कहा- मैं शहर से बाहर हूं। मैंने बात की थी। मुझे लगता है कि उन्हें रिहा कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने CJI से दखल की मांग करते हुए आरोप लगाया था

कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान महिला अधिवक्ताओं समेत कई वकीलों को

हिरासत में लिया गया और पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।

शिंदे ने की प्रदर्शनकारियों से अपील

 

 

See also  दतिया उपचुनाव 2026: चुनाव आयोग ने जारी की अधिसूचना, जानें पूरा कार्यक्रम

विवाद की जड़ क्या है?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है।

CJP और प्रदर्शन में शामिल विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया है।

उनकी मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और SIR पर रोक लगाई जाए।

दूसरी ओर, मतदाता सूची का सत्यापन चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है।

नाम हटाने या जोड़ने की प्रत्येक कार्रवाई को संबंधित नियमों

और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए।