25 साल का रिकॉर्ड टूटा, शेयर बाजार में लगातार 8वें हफ्ते गिरावट; सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम

सेंसेक्स-निफ्टी लगातार 8वें हफ्ते गिरे। FII बिकवाली, महंगा क्रूड और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।

नई दिल्ली।

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

1 अक्टूबर को बाजार लगातार आठवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ।

इस तरह निफ्टी और सेंसेक्स ने करीब 25 साल की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की।

Reuters के मुताबिक, आठ हफ्तों में निफ्टी करीब 8.7% और सेंसेक्स 8.4% टूट चुका है।

गुरुवार को भी बिकवाली हावी रही।

सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79% गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ।

वहीं, निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88% टूटकर 22,421.95 पर आ गया।

8 हफ्तों से लगातार लाल निशान

दरअसल, बाजार में यह गिरावट लगातार बढ़ रही है।

इस सप्ताह निफ्टी 3.1% और सेंसेक्स 2.7% नीचे आया।

इसके साथ ही आठ सप्ताह की कुल गिरावट निफ्टी में 8.7% और सेंसेक्स में 8.4% हो गई।

यह सिलसिला 2001 के बाद सबसे लंबा है।

FII की रिकॉर्ड बिकवाली ने बढ़ाई चिंता

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की बिकवाली से आया है।

2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से करीब 27.8 अरब डॉलर निकाल चुके हैं।

यह रिकॉर्ड स्तर की निकासी है।

इसके अलावा, रुपये की कमजोरी ने भी दबाव बढ़ाया है।

1 अक्टूबर को रुपया करीब 0.5% गिरकर 96.3150 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

महंगा क्रूड बना दूसरा बड़ा झटका

दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार के लिए चिंता बढ़ा रही हैं।

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Brent crude 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है।

ऐसे में महंगा तेल आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकता है।

इसके साथ ही अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.34% तक पहुंच गई।

यह स्तर 2002 के बाद सबसे ऊंचा बताया गया है।

ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव

बाजार की कमजोरी का असर कई सेक्टरों पर पड़ा।

खासकर ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में दबाव रहा।

इस सप्ताह ऑटो इंडेक्स करीब 5.9% गिरा।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में भी 6.2% की गिरावट रही।

हालांकि, IT सेक्टर ने राहत दी।

गुरुवार को IT इंडेक्स 2.2% चढ़ा।

पूरे सप्ताह यह करीब 0.5% बढ़ा।

सितंबर भी निवेशकों के लिए कमजोर रहा

इससे पहले सितंबर में भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रहा।

महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 2.7 अरब डॉलर निकाले।

इसके साथ 2026 में कुल FII (Foreign Institutional Investor)आउटफ्लो 26.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।

वहीं, ऊंचे तेल भाव और वैश्विक ब्याज दरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

अमेरिका समेत कई देशों में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा।

अब बाजार के लिए ये संकेत अहम

आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कई बड़े संकेतकों पर रहेगी।
– FII की खरीद-बिक्री
– कच्चे तेल की कीमत
– रुपये की चाल
– अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
– RBI की ब्याज दर नीति
– वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम
– कंपनियों के तिमाही नतीजे

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खास तौर पर महंगा क्रूड और ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

Reuters के अनुसार, RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक भी निवेशकों के रडार पर है।