BRICS Summit में उठेगा ‘नई दुनिया’ का मुद्दा, UNSC सुधार पर भारत को मिल सकता है बड़ा समर्थन

BRICS Summit 2026 में बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, UNSC सुधार और ग्लोबल साउथ की भूमिका पर प्रमुखता से चर्चा होगी।

नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठने की उम्मीद है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और बहुपक्षवाद को मजबूत करने तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की जरूरत पर जोर दे सकते हैं। भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।

बहुध्रुवीय दुनिया की जरूरत पर जोर

मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच BRICS का यह सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की अध्यक्षता में संगठन का जोर लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर है। साथ ही वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी।

BRICS में अब कई नए सदस्य शामिल हो चुके हैं। ऐसे में संगठन का दायरा और वैश्विक प्रभाव पहले की तुलना में बढ़ा है। भारत इस मंच के जरिए ग्लोबल साउथ के हितों को प्रमुखता देने और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की दिशा में प्रयास कर रहा है।

UNSC सुधार भी अहम मुद्दा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार लंबे समय से भारत समेत कई देशों की प्रमुख मांग रही है। भारत का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और बदलती आर्थिक एवं राजनीतिक ताकतों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र की निर्णय लेने वाली संस्थाओं में व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है।

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BRICS के मंच पर भी बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार का मुद्दा पहले उठता रहा है। 2021 के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में भी बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

भारत के लिए क्यों अहम है BRICS Summit?

भारत के लिए इस साल का BRICS सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश 2026 में संगठन की अध्यक्षता कर रहा है। भारत का एजेंडा आर्थिक सहयोग के साथ-साथ खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, महत्वपूर्ण सप्लाई चेन, तकनीक और सतत विकास जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है।

भारत BRICS को किसी एक देश या समूह के खिलाफ गठबंधन के बजाय वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने वाले व्यापक मंच के रूप में पेश करना चाहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सम्मेलन के दौरान वैश्विक व्यापार, वित्तीय व्यवस्था और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।

पश्चिम एशिया संकट की भी पड़ेगी छाया

नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष ने वैश्विक राजनीति को प्रभावित किया है। BRICS के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग देशों के हित और दृष्टिकोण हैं। ऐसे में साझा घोषणा-पत्र तैयार करना अध्यक्ष देश भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक चुनौती होगा।

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मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की मुलाकात पर भी नजर

BRICS Summit में कई प्रमुख नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर भी दुनिया की नजर है। खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस का बहुध्रुवीयता और UNSC सुधार पर जोर BRICS के उस एजेंडे को मजबूत कर सकता है, जिसमें वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की मांग शामिल है।