श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद भगवान बाल गोपाल की छठी मनाने की परंपरा है। जिस तरह हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी का आयोजन किया जाता है, उसी तरह भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद भी उनकी छठी पूजा की जाती है। इसे लड्डू गोपाल की छठी के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें कई तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है। मंदिरों के साथ-साथ घरों में भी भक्त बाल गोपाल को सजाकर पूजा करते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं।
2026 में कब मनाई जाएगी श्रीकृष्ण की छठी?
हिंदू पंचांग के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। जन्माष्टमी के बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान बाल गोपाल की छठी मनाने की परंपरा है।
वर्ष 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई गई थी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की छठी 9 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। हालांकि, कुछ स्थानों पर उदया तिथि को मानने की परंपरा के चलते 10 सितंबर को भी छठी पूजा की जा सकती है।
ऐसे में स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार पूजा की तारीख में अंतर हो सकता है।
क्यों मनाई जाती है भगवान कृष्ण की छठी?
सनातन परंपरा में बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी मनाने की मान्यता है। इसी परंपरा के आधार पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद भी उनकी छठी का उत्सव मनाया जाता है।
भक्त इस दिन बाल गोपाल को शिशु स्वरूप में सजाते हैं। उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं, विशेष श्रृंगार किया जाता है और विधि-विधान से पूजा की जाती है। कई मंदिरों में इस अवसर पर भजन-कीर्तन और विशेष धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
बाल गोपाल को लगाएं माखन-मिश्री का भोग
भगवान श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री बेहद प्रिय माने जाते हैं। इसलिए छठी के अवसर पर माखन-मिश्री का भोग लगाना विशेष शुभ माना जाता है।
भक्त भगवान को माखन-मिश्री के साथ अन्य सात्विक पकवानों का भोग भी लगा सकते हैं।
पंजीरी और पंचामृत का भोग
लड्डू गोपाल की छठी पर पंजीरी भी प्रसाद के रूप में तैयार की जा सकती है। इसके अलावा भगवान को पंचामृत का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत को पूजा के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
मखाने की खीर और कढ़ी-चावल भी चढ़ाएं
छठी के अवसर पर घर में बनाए गए सात्विक व्यंजनों का भोग भगवान बाल कृष्ण को लगाया जा सकता है। इनमें मखाने की खीर और कढ़ी-चावल भी शामिल हैं।
भोग तैयार करते समय शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा पूरी होने के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों और श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।
कैसे करें बाल गोपाल की छठी की पूजा?
- सबसे पहले पूजा स्थल और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को साफ करें।
- बाल गोपाल को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं।
- भगवान का सुंदर श्रृंगार करें और उन्हें पालने में विराजमान करें।
- दीपक और धूप जलाकर पूजा शुरू करें।
- भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, पंजीरी, पंचामृत और अन्य सात्विक व्यंजनों का भोग लगाएं।
- श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें और आरती करें।
- अंत में परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।
ध्यान दें: श्रीकृष्ण की छठी की तिथि और पूजा की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ अलग हो सकती है। इसलिए पूजा के लिए अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग की तिथि को प्राथमिकता दें।