काहिरा: मिस्र की चर्चित टीवी होस्ट और मीडिया पर्सनैलिटी सारा खलीफा (Sarah Khalifa) को ड्रग्स से जुड़े एक बड़े मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। काहिरा की क्रिमिनल कोर्ट ने सारा खलीफा समेत 12 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। सभी पर संगठित आपराधिक गिरोह बनाकर सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण और तस्करी से जुड़े अपराधों में शामिल होने का आरोप था।
12 आरोपियों को सुनाई गई मौत की सजा
अदालत ने सारा खलीफा और 11 अन्य आरोपियों को ऐसे आपराधिक गिरोह का हिस्सा बनाने का दोषी माना, जो सिंथेटिक नशीले पदार्थ तैयार करने के लिए कच्चा माल हासिल करता था और फिर उन्हें तस्करी के लिए इस्तेमाल करता था।
मामले में आरोपियों पर बिना लाइसेंस हथियार और गोला-बारूद रखने के आरोप भी लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष ने आरोपों के समर्थन में गवाहों के बयान के साथ तकनीकी और डिजिटल सबूत भी पेश किए थे। इनमें कथित गतिविधियों से जुड़े संदेश, तस्वीरें और वीडियो शामिल थे।
कौन हैं सारा खलीफा?
39 वर्षीय सारा खलीफा मिस्र की जानी-मानी टीवी होस्ट हैं। वह खास तौर पर ‘Mission Impossible’ नाम के कार्यक्रम से चर्चित हुईं, जिसमें सुरक्षा और अपराध से जुड़े विषयों पर चर्चा होती थी।
टीवी करियर के अलावा खलीफा का कॉस्मेटिक सर्जरी क्लिनिक और इवेंट्स से जुड़ा कारोबार भी बताया जाता है। उन्हें अप्रैल 2025 में इस मामले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।
750 किलो से ज्यादा नशीले पदार्थ बरामद
मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ और ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद करने का दावा किया था। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान 750 किलोग्राम से ज्यादा ड्रग्स और कच्चा माल जब्त किया गया।
जांच एजेंसियों को दो ऐसे अपार्टमेंट भी मिले, जिनका कथित तौर पर ड्रग्स बनाने के लिए लैब के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके अलावा बिना लाइसेंस के हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए।
28 आरोपी थे, 9 को उम्रकैद और 7 बरी
यह मामला केवल 12 दोषियों तक सीमित नहीं था। अभियोजन पक्ष ने कुल 28 लोगों के खिलाफ मामला चलाया था। अदालत ने सारा खलीफा समेत 12 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई, जबकि 9 आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी गई।
वहीं, मामले में 7 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
ग्रैंड मुफ्ती से ली गई थी राय
मिस्र में मौत की सजा से जुड़े मामलों में अदालत को देश के ग्रैंड मुफ्ती से राय लेना जरूरी होता है। इस मामले में भी अदालत ने मौत की सजा पर ग्रैंड मुफ्ती की राय मांगी थी।
हालांकि, मुफ्ती की राय अदालत के लिए बाध्यकारी नहीं होती। इसके बाद काहिरा की अदालत ने अंतिम फैसला सुनाया। दोषी ठहराए गए आरोपियों को फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च आपराधिक अदालत कोर्ट ऑफ कैसेशन में अपील करने का अधिकार है।
अलग मामले में भी मिली 5 साल की सजा
सारा खलीफा और कुछ अन्य आरोपियों को एक अलग मामले में भी सजा सुनाई गई है। इस मामले में एक युवक के अपहरण और उसके साथ मारपीट के आरोप शामिल थे। इस केस में उन्हें 5 साल जेल की सजा दी गई।
सारा खलीफा ने आरोपों से किया था इनकार
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ के दौरान सारा खलीफा ने ड्रग्स से जुड़े आरोपों में अपनी भूमिका से इनकार किया था। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि उन्होंने पुलिस स्टेशन में तस्वीरों में दिखाए जाने से पहले ड्रग्स नहीं देखे थे।
हालांकि, अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों, डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया। अब उनके पास फैसले के खिलाफ अपील का विकल्प मौजूद है।
मौत की सजा के प्रावधान को लेकर चर्चा
मिस्र में कुछ गंभीर अपराधों, जिनमें ड्रग्स की तस्करी भी शामिल है, के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। सारा खलीफा के मामले ने देश में ड्रग्स के खिलाफ कड़े कानूनी रुख को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।