उज्जैन में 14वीं सदी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार ढहा, निर्माण कार्य के बीच हादसा; लापरवाही पर उठे सवाल

उज्जैन में महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाले मार्ग पर करीब 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार ढह गया। निर्माण कार्य और लगातार बारिश के बीच हुए इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ा एक बड़ा हादसा सामने आया है। महाकाल मंदिर से रामघाट की ओर जाने वाले पुराने मार्ग पर स्थित करीब 14वीं शताब्दी का महाकाल द्वार देर रात अचानक ढह गया। राहत की बात यह रही कि घटना के वक्त आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिसके चलते किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। 

निर्माण कार्य के दौरान ढहा ऐतिहासिक द्वार

जानकारी के अनुसार, महाकाल द्वार के आसपास निर्माण और खुदाई से जुड़ा काम चल रहा था। इसी दौरान लगातार हो रही बारिश के कारण जमीन में नमी बढ़ने और मिट्टी के कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। इसके बाद ऐतिहासिक द्वार का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया।

हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल द्वार गिरने की वास्तविक वजह की जांच की जा रही है।

करीब 2.12 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा था जीर्णोद्धार

रिपोर्टों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक द्वार का जीर्णोद्धार उज्जैन स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कराया जा रहा था। इसके लिए करीब 2.12 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान ही सदियों पुराने ढांचे के गिरने से इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 

लगातार बारिश के बीच हुआ हादसा

उज्जैन और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से बारिश का दौर जारी है। लगातार बारिश के कारण मिट्टी के धंसने और पुराने निर्माणों की मजबूती प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि द्वार केवल बारिश और प्राकृतिक कारणों से गिरा या इसके पीछे निर्माण कार्य से जुड़ी कोई तकनीकी लापरवाही भी रही। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।

ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा पर उठे सवाल

महाकाल क्षेत्र उज्जैन की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में करीब 14वीं शताब्दी पुराने द्वार का गिरना शहर की विरासत के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने पुराने ढांचे के आसपास खुदाई और निर्माण कार्य शुरू करने से पहले उसकी संरचनात्मक सुरक्षा का पर्याप्त आकलन किया गया था या नहीं। अब निगाहें प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर हैं।

फिलहाल प्रशासन की ओर से घटना की जांच की जा रही है और द्वार के गिरने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।