नई दिल्ली।
कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हो रही है।
मामले में अब नया मोड़ आया है।
एक ओर सुप्रीम कोर्ट पहले सरकार को सख्त चेतावनी दे चुका है।
दूसरी ओर सरकार का कहना है कि विजय शाह का इरादा कर्नल सोफिया कुरैशी का अपमान करना नहीं था।
सरकार के मुताबिक, मंत्री उनकी तारीफ करना चाहते थे।
हालांकि, वे अपनी बात सही तरीके से नहीं रख सके।
सरकार के नरम रुख पर आज होगी नजर
सुप्रीम कोर्ट में FIR और अभियोजन से जुड़े मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस जे.वी. मोहन की बेंच कर रही है।
इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी मंत्री के प्रति नरम रुख अपनाने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि विजय शाह कर्नल सोफिया कुरैशी की तारीफ करना चाहते थे।
लेकिन, उनके शब्दों और बयान का तरीका गलत था।
ऐसे में आज सुप्रीम कोर्ट का रुख अहम होगा।
कैबिनेट ने नहीं दी मुकदमे की मंजूरी
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने हाल ही में विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी न देने का प्रस्ताव पारित किया है।
25 अगस्त की कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार हुआ था।
इसके बाद पूरी कैबिनेट ने प्रस्ताव राज्यपाल मंगू भाई पटेल के पास भेज दिया।
कानून के अनुसार, मौजूदा मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरी की जरूरत होती है।
कैबिनेट का तर्क है कि विजय शाह सार्वजनिक मंचों और लिखित रूप में तीन से चार बार माफी मांग चुके हैं।
इसलिए, मंत्रियों ने मुकदमे को आगे बढ़ाने का औचित्य नहीं माना।
हालांकि, अंतिम फैसला राज्यपाल के स्तर पर होना है।
राज्यपाल के फैसले पर भी रहेगी नजर
अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि राज्यपाल ने कैबिनेट की सिफारिश पर अंतिम निर्णय लिया है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की दलीलों से इस स्थिति की तस्वीर साफ हो सकती है।
इसी कारण आज की सुनवाई और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
विवादित टिप्पणी के बाद दर्ज हुआ था केस
विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
उन्होंने उन्हें ‘आतंकवादियों की बहन’ कहकर संबोधित किया था।
बयान के बाद मामला तूल पकड़ गया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विशेष जांच दल यानी SIT बनाई गई।
SIT ने भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी।
‘Enough is enough’, कोर्ट ने दिखाई थी सख्ती
अभियोजन की मंजूरी में देरी पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी मध्य प्रदेश सरकार को फटकार लगा चुका है।
कोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा था— “Enough is enough, हमारे आदेश का पालन कीजिए।”
अदालत ने सरकार को अंतिम निर्णय के लिए चार सप्ताह का समय दिया था।
मंत्री की ओर से बार-बार माफी मांगने की दलील भी कोर्ट में रखी गई थी।
लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा था कि माफी बहुत देर से आई है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि माफी कानूनी कार्रवाई और अदालत के संज्ञान के बाद सामने आई।
अब सवाल यही है कि सुप्रीम कोर्ट आज सरकार के नए तर्क को कितना महत्व देता है।
और क्या विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के मामले में कोई स्पष्ट दिशा तय होती है।
आज की सुनवाई पर राजनीतिक और कानूनी दोनों नजरें टिकी हैं।
विजय शाह केस: 16 महीने में क्या हुआ
11 मई 2025 — महू में मंत्री विजय शाह का विवादित बयान
मई 2025 — हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान, FIR के निर्देश
मई 2025 — सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SIT का गठन
अगस्त 2025 — SIT ने केस चलाने की मंजूरी मांगी
19 जनवरी 2026 — सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फैसला लेने के लिए 2 हफ्ते दिए
मई 2026 — सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्ते में अनुपालन रिपोर्ट मांगी
23 जुलाई 2026 — सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट: सरकार ने कोई दस्तावेज नहीं दिया
26 अगस्त 2026 — कैबिनेट ने मंजूरी न देने का फैसला लिया
31 अगस्त 2026 — सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
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