नेपाल:सुरंगों में फंसी सांसें,6 इंच के छेद से भेजी हवा,804 मौतें,2500 से अधिक लापता

नेपाल की बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए 6 इंच का छेद कर हवा पहुंचाई जा रही है। नेपाल में 788 और तिब्बत में 16 मौतों के साथ कुल आंकड़ा 804 पहुंच गया है।


काठमांडू।

नेपाल की भीषण बाढ़ में अब रेस्क्यू ऑपरेशन सबसे कठिन मोड़ पर पहुंच गया है।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंग मिट्टी और मलबे से भरी हैं।

इसमें कई लोगों के फंसे होने की आशंका है।

इन तक पहुंचने बचावकर्मियों ने सुरंग में 6 इंच का छेद किया है।

इस छेद के जरिए पाइप डालकर अंदर हवा पहुंचाई जा रही है।

अब इसी छेद को बड़ा कर मैनहोल जैसा रास्ता बनाने की तैयारी है।

इसके बाद बचावकर्मी सुरंग के अंदर जाकर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।

सुरंगों में जिंदगी की जंग

त्रिशूली-3A समेत कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

बचाव दल ड्रिलिंग मशीनों, एक्सकेवेटर और हाइड्रोलिक उपकरणों से मलबा हटा रहे हैं।

हालांकि, बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर ऑपरेशन को बार-बार मुश्किल बना रहा है।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, कई सुरंगों में 100 से ज्यादा कर्मचारियों के जिंदा फंसे होने की आशंका है।

वहीं, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े कुल 933 कर्मचारी अब भी लापता हैं।

कुछ रिपोर्टों में फंसे और बचाए गए कर्मचारियों के अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।

ऐसे में प्रशासन सभी साइटों पर सटीक संख्या की पुष्टि में जुटा है।

                      (A specialised technical team from India has begun on-site reconnaissance of hydropower tunnels)

भारत की टीम भी पहुंची

रेस्क्यू ऑपरेशन में अब भारत की तकनीकी मदद भी शामिल हो गई है।

भारत से सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंच चुकी है।

यह टीम प्रभावित हाइड्रोपावर सुरंगों का तकनीकी निरीक्षण कर रही है।

भारत ने विशेषज्ञों और राहत सामग्री के जरिए बचाव अभियान में मदद बढ़ाई है।

नेपाल में 788 मौतें, 2,502 लोग लापता

ताजा आधिकारिक अपडेट के मुताबिक, नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है।

वहीं, 2,502 लोग अब भी लापता हैं।

नेपाल में बरामद शवों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

कई शव दूरदराज के इलाकों और नदियों के किनारों से मिल रहे हैं।

तिब्बत में भी 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

इस तरह नेपाल और तिब्बत में कुल मृतकों का आंकड़ा कम से कम 804 तक पहुंच गया है।

तिब्बत में 546 लोग भी लापता बताए गए हैं।

कई जिलों में तबाही

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में भारी भू-खंड और हिमनदीय सामग्री के खिसकने के बाद भयंकर बाढ़ आई थी।

इसके बाद मलबा और पानी तेजी से नदी तंत्र में फैल गया।

रासुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई जिले इसकी चपेट में आए।

सड़कें, पुल, घर और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ।

त्रिशूली नदी का जलस्तर बेहद तेजी से बढ़ा।

इससे आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे कर्मचारी भी फंस गए।

कई सुरंगों में घुसा मलबा

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में पानी के साथ भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा घुस गया।

इससे कई प्रवेश और निकास मार्ग बंद हो गए।

त्रिशूली-3A रेस्क्यू ऑपरेशन में ड्रिलिंग कर सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंचने की कोशिश की गई।

बचाव दल ने अंदर हवा भेजने के साथ कैमरा भेजने की भी कोशिश की है।

लेकिन बारिश के कारण खुदाई वाली जगह में दोबारा पानी भर गया था।

बाद में पानी घटने पर ऑपरेशन फिर शुरू किया गया।

त्रिशूली-3A प्रोजेक्ट पर भी भारी असर

त्रिशूली-3A नेपाल का प्रमुख जलविद्युत प्रोजेक्ट है।

यह रासुवा और नुवाकोट क्षेत्र में त्रिशूली नदी से जुड़ा है।

बाढ़ ने परियोजना की सुरंगों और अन्य ढांचों को भी नुकसान पहुंचाया है।

बाढ़ के समय कई कर्मचारी सुरंगों और भूमिगत हिस्सों में तकनीकी काम कर रहे थे। अचानक आए सैलाब और मलबे ने बाहर निकलने के रास्ते बंद कर दिए।

चितवन में बरामद हो रहे शव

बाढ़ में बहे शव कई किलोमीटर दूर तक पहुंच रहे हैं।

इससे शवों की पहचान और उन्हें सुरक्षित रखने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

काठमांडू पोस्ट के अनुसार, कई अस्पतालों और अस्थायी केंद्रों में अज्ञात शवों की पहचान के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं।

आपदा प्रभावित इलाकों में राहत, बचाव और शवों की पहचान—तीनों काम एक साथ चल रहे हैं।

20 साल की युवती ने खोए 17 परिजन

रसुवा जिले की 20 वर्षीय कोपिला तामांग की कहानी इस आपदा की भयावहता को सामने लाती है।

उन्होंने बाढ़ में अपने परिवार के 17 लोगों को खो दिया।

इनमें उनकी मां, बहन, दादी और एक महीने का भतीजा भी शामिल बताया गया है।

2015 के भूकंप में उनका पुराना घर तबाह हुआ था।

इसके बाद परिवार ने नया घर बसाया था।

लेकिन इस बार बाढ़ नया घर भी बहा ले गई।

अभी सबसे बड़ा सवाल—सुरंगों में कौन जिंदा है?

नेपाल में राहत और बचाव अभियान का सबसे कठिन हिस्सा अभी जारी है।

मलबे से भरी सुरंगों के भीतर कितने लोग सुरक्षित हैं, इसकी पूरी तस्वीर साफ नहीं है।

इसलिए हर घंटे की रेस्क्यू कोशिश बेहद अहम मानी जा रही है।

अब नजर 6 इंच के उस छेद पर है,

जिसे बड़ा कर सुरंग के भीतर पहुंचने का रास्ता बनाया जा रहा है।

अगर अंदर फंसे लोग सुरक्षित मिले, तो यह नेपाल के सबसे कठिन रेस्क्यू ऑपरेशनों में एक बड़ी सफलता हो सकती है।

जिंदा मिली मुर्गिंयां

नेपाल के सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में से एक, धाडिंग में कुछ लोग अपने बर्बाद हो चुके घरों में यह देखने के लिए लौटने लगे कि क्या कुछ बचाया जा सकता है।

लोग ऐसे घरों में बैठे थे जिनकी दीवारें बाढ़ में बह गई थीं और वे बालकनी या खिड़की के फ्रेम से कीचड़ और मलबा हटा रहे थे।

कुछ लोग ज़मीन पर ऐसी चीज़ें ढूंढ रहे थे जिन्हें कीचड़ से निकालकर धोया जा सके।

एक व्यक्ति अपनी मुर्गियों को लेने लौटा था, जो उसे ज़िंदा मिल गईं।

उसने उन्हें बांधा और अपने ट्रक के केबिन में रख दिया।

धाडिंग की रहने वाली शर्मिला तमांग, जो अपने घर से सामान बचाने की कोशिश कर रही थीं, ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया, “सब कुछ खत्म हो गया है। कुछ भी नहीं बचा है। हमारा घर भी नहीं।”

बाढ़ से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए एक अहम पावर प्लांट में, कर्मचारियों ने रविवार को नुकसान का जायज़ा लेने के लिए सुविधाओं की जांच शुरू की।

यह प्लांट चार ज़िलों में 20,000 से ज़्यादा लोगों को बिजली पहुंचाता है।

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