सिंगरौली/भोपाल।
प्रदेश में नशे के खिलाफ पुलिस का अभियान चल रहा है।
लोगों को नशीले पदार्थों से दूर रहने का संदेश दिया जा रहा है।
डीजीपी कैलाश मकवाना की पहल पर अवैध नशे के कारोबारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
लेकिन इसी अभियान के बीच ऊर्जाधानी सिंगरौली से सामने आए कुछ वायरल वीडियो ने खाकी की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो जिले के बैढ़न थाना क्षेत्र का है।
इसमें सासन चौकी में पदस्थ एएसआई सुरेंद्र पांडे कथित तौर पर कुछ लोगों के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में उनके हाथ में गिलास और सिगरेट जैसी वस्तु नजर आने का दावा किया जा रहा है।
वहीं, एक अन्य कथित वीडियो में ASI को जुआ से जुड़े एक मामले में
10 हजार रुपये में समझौता कराने की बात करते हुए सुना जा सकता है।
नशामुक्ति के संदेश और वायरल तस्वीर

यहीं से सवाल उठता है कि जब पुलिस खुद ‘नशे से दूरी है जरूरी’ का संदेश लेकर जनता के बीच पहुंच रही है,
तब उसके अपने अधिकारियों के ऐसे कथित वीडियो सामने आने पर क्या संदेश जाएगा?
पुलिस से केवल कानून लागू कराने की अपेक्षा नहीं होती।
समाज उसे अनुशासन और जिम्मेदारी की मिसाल के रूप में भी देखता है।
इसलिए वायरल वीडियो पर सवाल केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं हैं।
सवाल पुलिस विभाग की उस जिम्मेदारी पर भी है,
जिसके तहत आम लोगों को नशे के दुष्परिणाम समझाए जा रहे हैं।
‘10 हजार में निपटारा’ वाली बातचीत पर भी सवाल
दूसरे वायरल वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
वीडियो में कथित तौर पर जुआ से जुड़े एक व्यक्ति से 10 हजार रुपये में मामला निपटाने की बातचीत सुनाई देने का दावा किया जा रहा है।
यदि वीडियो में हुई बातचीत की जांच में पुष्टि होती है, तो मामला केवल वर्दी की गरिमा का नहीं रहेगा।
यह पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाब0देही से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करेगा।
जनप्रचार नहीं करता वायरल वीडियो की पुष्टि
हालांकि, जनप्रचार वायरल वीडियो की सत्यता, वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य और उसमें सुनाई दे रही बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बनाए गए।
संबंधित अधिकारी का पक्ष और पुलिस विभाग का आधिकारिक रुख भी महत्वपूर्ण होगा।
ऐसे में अंतिम निष्कर्ष से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अब पुलिस मुख्यालय की परीक्षा?
वायरल वीडियो पर आम लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।
सबकी नजर अब इस बात पर है कि सिंगरौली पुलिस और पुलिस विभाग इन वीडियो का संज्ञान लेते हैं या नहीं।
वीडियो की जांच कराई जाती है या नहीं। और जांच में आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई होती है या नहीं।
नशे के खिलाफ अभियान जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है अभियान चलाने वालों की विश्वसनीयता।
इस मामले में बैढ़न थाना प्रभारी अशोक सिंह परिहार का पक्ष जानने ,
उनसे संपर्क का प्रयास किया गया,लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।