भोपाल.
मध्य प्रदेश में तीन प्रमुख फोरलेन सड़कों पर जारी टोल वसूली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
देवास-भोपाल, लेबड़-जावरा और जावरा-नयागांव फोरलेन परियोजनाओं की लागत और अब तक हुई टोल वसूली के आंकड़ों ने बहस तेज कर दी है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों सड़कों के निर्माण पर शुरुआती तौर पर करीब 1,360 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
वहीं, जून 2025 तक इन मार्गों से 6,522 करोड़ रुपये से अधिक की टोल वसूली हो चुकी थी।
बाद में सरकार की ओर से परियोजनाओं की संशोधित लागत का आंकड़ा भी सामने रखा गया।
तीनों परियोजनाओं की लागत और वसूली पर सवाल
टोल वसूली को लेकर सबसे बड़ा सवाल शुरुआती निर्माण लागत और अब तक वसूली गई रकम के बीच के अंतर को लेकर है।
सरकार द्वारा पेश किए गए नए आंकड़ों के अनुसार, तीनों परियोजनाओं की संशोधित लागत 7,818.57 करोड़ रुपये बताई गई है।
वहीं, 31 मार्च 2026 तक कुल टोल वसूली 7,225.76 करोड़ रुपये दर्ज की गई है।
हालांकि, संशोधित लागत और वसूली के आंकड़ों के बावजूद इन मार्गों पर टोल संग्रह की अवधि अभी खत्म नहीं हुई है।
यानी वाहन चालकों से आने वाले वर्षों में भी टोल वसूली जारी रहने वाली है।
देवास-भोपाल फोरलेन पर सबसे ज्यादा चर्चा
देवास-भोपाल फोरलेन की मूल परियोजना लागत 345.64 करोड़ रुपये बताई गई थी।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 तक इस मार्ग से 1,889.51 करोड़ रुपये की टोल वसूली हो चुकी थी।
यह रकम शुरुआती लागत की तुलना में करीब 546.67 प्रतिशत बैठती है।
इसी वजह से यह मार्ग टोल वसूली को लेकर चर्चा के केंद्र में है।
बढ़ गया वाहनों का दबाव
देवास-भोपाल मार्ग पर समय के साथ यातायात भी बढ़ा है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, करीब तीन साल पहले इस मार्ग से लगभग 35.74 लाख वाहन गुजरते थे।
अब यह संख्या बढ़कर करीब 52.16 लाख वाहन हो गई है।
वाहनों की संख्या बढ़ने का सीधा असर टोल संग्रह पर भी पड़ता है।
ज्यादा ट्रैफिक का मतलब टोल प्लाजा से अधिक वाहन गुजरना और उसके अनुसार ज्यादा राजस्व प्राप्त होना है।
टोल वसूली कब तक जारी रहेगी?
इन परियोजनाओं पर टोल वसूली की अवधि अलग-अलग निर्धारित है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देवास-भोपाल मार्ग पर 21 मई 2033 तक टोल वसूली जारी रह सकती है।
वहीं, जावरा-नयागांव फोरलेन पर टोल संग्रह की निर्धारित अवधि 26 अक्टूबर 2033 तक बताई गई है।
कुछ परिस्थितियों में ‘चेंज ऑफ स्कोप’ के तहत टोल अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
तीनों परियोजनाओं से जुड़े टोल की वसूली अलग-अलग अनुबंध और परियोजना शर्तों के तहत होती है,
इसलिए केवल शुरुआती निर्माण लागत और वसूली की तुलना से पूरी वित्तीय तस्वीर सामने नहीं आती।
सरकार के नए आंकड़ों से क्या बदला?
टोल विवाद के बीच सरकार ने परियोजनाओं की संशोधित लागत का आंकड़ा सामने रखा है। शुरुआती लागत और संशोधित लागत में बड़ा अंतर होने के कारण अब बहस सिर्फ टोल वसूली की रकम तक सीमित नहीं है।
इसमें परियोजना की संशोधित लागत, निर्माण के दौरान हुए बदलाव, अतिरिक्त काम, अनुबंध की शर्तें और टोल वसूली की निर्धारित अवधि जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
जनता के बीच क्यों उठ रहे सवाल?
जब किसी परियोजना से लंबे समय तक टोल वसूली होती है, तो उसकी अवधि और कुल वसूली की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।
दूसरी ओर, सड़क परियोजनाओं की लागत में समय के साथ बदलाव, रखरखाव, अतिरिक्त निर्माण और अनुबंध संबंधी प्रावधान भी शामिल हो सकते हैं।
इसलिए टोल से मिलने वाली कुल रकम को केवल मूल निर्माण लागत से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता।
प्रमुख आंकड़े एक नजर में
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तीन फोरलेन परियोजनाओं की शुरुआती कुल लागत: लगभग 1,360 करोड़ रुपये
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जून 2025 तक टोल वसूली: 6,522 करोड़ रुपये से अधिक
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31 मार्च 2026 तक दर्ज कुल वसूली: 7,225.76 करोड़ रुपये
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तीनों परियोजनाओं की संशोधित लागत: 7,818.57 करोड़ रुपये
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देवास-भोपाल की मूल लागत: 345.64 करोड़ रुपये
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देवास-भोपाल से जून 2025 तक वसूली: 1,889.51 करोड़ रुपये
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देवास-भोपाल मार्ग पर टोल की निर्धारित अवधि: 21 मई 2033 तक
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जावरा-नयागांव पर निर्धारित अवधि: 26 अक्टूबर 2033 तक
