ट्रंप की उड़ान को लेकर बड़ा खुलासा, ईरानी खतरे के चलते बदला गया एयर फोर्स वन का प्लान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को पुष्टि की कि उन्होंने पिछले महीने तुर्की से एक सैन्य विमान पर उड़ान भरी क्योंकि एयर फोर्स वन को ‘अधिक जोखिम’ था। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सीक्रेट सर्विस के अनुरोध पर हुआ था, जिसने कथित खतरों की सूचना दी थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि पिछले महीने तुर्की यात्रा के दौरान उनकी उड़ान में बदलाव सुरक्षा कारणों से किया गया था। ट्रंप के मुताबिक, सीक्रेट सर्विस ने संभावित खतरे को देखते हुए उन्हें एयर फोर्स वन के बजाय एक सैन्य विमान से उड़ान भरने की सलाह दी थी। बताया गया कि सुरक्षा एजेंसियों को ईरान से जुड़े संभावित खतरे की जानकारी मिली थी।

सीक्रेट सर्विस की सलाह पर बदली गई उड़ान

ट्रंप ने बुधवार को इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उड़ान बदलने का फैसला उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया था। उनके अनुसार, सीक्रेट सर्विस और सैन्य अधिकारियों ने स्थिति का आकलन किया और एयर फोर्स वन को लेकर अतिरिक्त जोखिम की आशंका के बीच वैकल्पिक विमान का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया।

राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं के दौरान सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरों का लगातार आकलन करती हैं। किसी भी जोखिम की स्थिति में यात्रा के मार्ग, विमान और सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल बदलाव किया जा सकता है।

तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आया मामला

यह घटना उस समय की बताई जा रही है, जब ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तुर्की पहुंचे थे। सम्मेलन के दौरान नाटो देशों के नेताओं के बीच सुरक्षा, रक्षा और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों को लेकर अहम चर्चा हुई थी।

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इसी दौरान राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी एजेंसियां भी सक्रिय थीं। कथित ईरानी खतरे की सूचना के बाद ट्रंप की यात्रा व्यवस्था में बदलाव किया गया। हालांकि, खतरे की प्रकृति और उसकी विश्वसनीयता से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं।

क्यों अहम है एयर फोर्स वन का विकल्प?

एयर फोर्स वन अमेरिकी राष्ट्रपति की आधिकारिक हवाई यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाला अत्यधिक सुरक्षित विमान है। इसमें संचार, सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने के लिए कई विशेष व्यवस्थाएं मौजूद होती हैं। इसके बावजूद राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां किसी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं करतीं।

ऐसे मामलों में वैकल्पिक विमान का इस्तेमाल सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ट्रंप की उड़ान में बदलाव भी इसी तरह के एहतियाती कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

ईरान से जुड़े खतरे ने बढ़ाई चिंता

ट्रंप के बयान में ईरानी खतरे का जिक्र ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का अहम मुद्दा बना हुआ है। राष्ट्रपति की विदेश यात्रा के दौरान किसी संभावित खतरे की सूचना मिलने पर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के लिए स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है।

इस घटनाक्रम से यह भी पता चलता है कि राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं में सुरक्षा योजना कितने स्तरों पर तैयार की जाती है। संभावित खतरे की स्थिति में यात्रा के दौरान आखिरी समय पर भी बदलाव किए जा सकते हैं।

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सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव का संकेत

ट्रंप की इस स्वीकारोक्ति के बाद राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां आम तौर पर ऐसे अभियानों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं करती हैं।

फिलहाल ट्रंप के बयान से इतना स्पष्ट है कि तुर्की यात्रा के दौरान उनकी उड़ान में बदलाव सामान्य प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि संभावित सुरक्षा जोखिम को देखते हुए उठाया गया कदम था।