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सिंगरौली अवैध रेत खनन की जांच में देरी पर सवाल,CM से शिकायत,अब NGT ने बनाई जांच समिति
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सिंगरौली अवैध रेत खनन की जांच में देरी पर सवाल,CM से शिकायत,अब NGT ने बनाई जांच समिति
सिंगरौली में कथित अवैध रेत खनन की जांच में देरी पर सवाल उठे हैं। NGT ने नई समिति बनाई है। शिकायतकर्ता ने सीएम से भी शिकायत की।
August 11, 2026
Ravi Awasthi
भोपाल(9826019364)।
सिंगरौली में रेत खनन से जुड़े मामले की जांच में देरी का आरोप लगा है।
शिकायतकर्ता विश्वमित्र शाह ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की है।
उन्होंने सिया की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
मामला रेत खनन का ठेका लेने वाली सहकार ग्लोबल कंपनी से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कंपनी ने आवंटित खदानों के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी खनन किया।
मामला फिलहाल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT में विचाराधीन है।
केंद्र के निर्देश पर सिया ने बनाई थी जांच समिति
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश के बाद सिया ने गत 11 मई को तीन सदस्यीय समिति गठित की थी।
समिति की अध्यक्षता सिया सदस्य
डॉ. सुनंदा रघुवंशी
को सौंपी गई थी।
समिति को 15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
शिकायतकर्ता का दावा है कि समिति ने अब तक मौके का निरीक्षण नहीं किया।
उनका आरोप है कि जांच को अलग-अलग कारणों से टाला गया।
बाद में मानसून शुरू होने के कारण समिति की अध्यक्ष ने जांच से हटने की इच्छा जताई।
हालांकि, शिकायतकर्ता के मुताबिक इसकी लिखित सूचना
सिया सचिव सुधीर कोचर
को नहीं दी गई।
जांच आगे नहीं बढ़ी तो NGT ने बनाई नई समिति
मामले में शिकायतकर्ता विश्वमित्र शाह की याचिका पर NGT ने सुनवाई की।
इसके बाद ट्रिब्यूनल ने अलग से संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
इस समिति में
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
वहीं, सिया के
सदस्य सचिव
को मामले में प्रतिवादी भी बनाया गया है।
इस घटनाक्रम के बाद सिंगरौली में कथित अवैध खनन की जांच को लेकर जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
इन क्षेत्रों में खनन के आरोप
https://janprachar.com/wp-content/uploads/2026/08/shah-video.mp4
शिकायत में
हर्रहवा, पिप्राकुंड, ऑर्गई, कंदोपानी और उर्ति
सहित आसपास के ग्राम पंचायत क्षेत्रों का उल्लेख है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन क्षेत्रों में निर्धारित सीमा से बाहर रेत खनन किया गया।
इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की बात भी शिकायत में कही गई है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
NGT के निर्देश के बाद प्रस्तावित संयुक्त जांच से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
जिला प्रशासन की जांच पर भी सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि जिला प्रशासन ने पहले भी जांच समिति बनाई थी।
आरोप है कि यह जांच भी केवल औपचारिकता तक सीमित रही।
केंद्र
के निर्देश के बाद मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भी जांच प्रक्रिया शुरू की गई थी।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस समिति ने भी मौके पर जाकर
जांच
ही नहीं की
।
सीएम से मिले विश्वमित्र शाह
मामले के शिकायतकर्ता
विश्वमित्र शाह
ने हाल ही में
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
से मुलाकात की।
उन्होंने सीएम को पूरे प्रकरण की जानकारी दी।
शाह ने सिया और जिला प्रशासन की कथित लापरवाही की शिकायत भी की।
उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
अब 20 अगस्त को होगी सुनवाई
मामले में NGT की अगली सुनवाई
20 अगस्त
को प्रस्तावित है।
अब संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट इस मामले में अहम मानी जा रही है।
यदि जांच में अवैध खनन की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
वहीं, आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
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