शिवरात्रि पर आस्था का सैलाब, शिवालयों में लगा भक्तों का तांता

सावन महीने की शिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, शिवभक्तों ने गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया

सावन महीने की शिवरात्रि के पावन पर्व पर उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह शिवमय नजर आ रही है। कनखल स्थित पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। शिवभक्त गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि हर महीने कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात और चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि का पर्व आता है, लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में कांवड़ की परंपरा के कारण सावन की शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है। जो श्रद्धालु पूरे सावन भगवान शिव की पूजा नहीं कर पाते, वे महाशिवरात्रि पर गंगाजल और एक बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करें तो विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

शिवरात्रि का महत्व

शिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, शिवभक्तों ने गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि हर महीने कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात और चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि का पर्व आता है, लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में कांवड़ की परंपरा के कारण सावन की शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है। जो श्रद्धालु पूरे सावन भगवान शिव की पूजा नहीं कर पाते, वे महाशिवरात्रि पर गंगाजल और एक बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करें तो विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

दक्षेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़

दक्षेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, शिवभक्तों ने गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। महिला श्रद्धालु ज्योति शर्मा ने कहा कि यह भगवान शिव की ससुराल है और यहां जल चढ़ाने का विशेष महत्व माना जाता है।

उन्होंने कहा कि भोलेनाथ इतने सरल और दयालु हैं कि मात्र जल अर्पित करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं। सुबह से ही श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयकारों के बीच जलाभिषेक कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मनचाही कामना पूरी होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

वीरभद्र महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता

वीरभद्र महादेव मंदिर में भी तड़के से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। शिव भक्तों ने लंबी लाइनों में लगकर भगवान शिव का जल, दूध, पंचामृत, गन्ने के रस से जलाभिषेक किया और फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित किए। मंदिर परिसर में हर तरफ बम बम भोले और हर हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे।

श्रद्धालु कृष्णा बैलवाल ने कहा कि जैसा कि आज वीरभद्र महादेव मंदिर में बड़ी संख्या में लोग आए हैं, वैसा पहले कभी नहीं देखा। यह भगवान शिव की महिमा ही है कि इतने लोग उनकी पूजा करने आते हैं।

शिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़

शिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, शिवभक्तों ने गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि हर महीने कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात और चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि का पर्व आता है, लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में कांवड़ की परंपरा के कारण सावन की शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है। जो श्रद्धालु पूरे सावन भगवान शिव की पूजा नहीं कर पाते, वे महाशिवरात्रि पर गंगाजल और एक बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करें तो विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। शिवरात्रि के बारे में जानें और शिवालयों की यात्रा के लिए तैयार हों।