होरमुज़ को लेकर ईरान की दो टूक, अमेरिका की शर्तें मानने तक नहीं खुलेगा जलडमरूमध्य

ईरान और अमेरिका के बीच होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर चल रही बातचीत में नए मोड़ आ गए हैं। ईरान ने कहा है कि ओमान के साथ समझौता होने से जलडमरूमध्य नहीं खुलेगा, जब तक कि अमेरिका उनकी शर्तें नहीं मानता।

ईरान और अमेरिका के बीच होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर चल रही बातचीत में तनाव कम होने के बजाय नई जटिलताएं सामने आ गई हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल ओमान के साथ किसी समझौते के आधार पर होरमुज़ जलडमरूमध्य को खोलने का फैसला नहीं किया जाएगा। तेहरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी प्रमुख शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बनना मुश्किल है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बातचीत को लेकर अपना रुख सख्त किया है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान से मुआवजे की मांग कर सकता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत के बावजूद विवाद के जल्द समाधान को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

ईरान में सेना की कमान में बड़ा बदलाव

होरमुज़ संकट के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने सेना की कमान में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। उन्होंने छह वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। यह फेरबदल ईरान के नए राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख की नियुक्ति के बाद हुआ है।

नए सुरक्षा प्रमुख को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का अनुभवी कमांडर माना जाता है। वह पहले भी अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर संदेह जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में सैन्य और सुरक्षा तंत्र में हुए इन बदलावों को मौजूदा तनाव के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है होरमुज़ जलडमरूमध्य?

होरमुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह ईरान और ओमान के बीच संकीर्ण समुद्री क्षेत्र में स्थित है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए इसकी भूमिका बेहद अहम है।

दुनिया के बड़े हिस्से की कच्चे तेल और ऊर्जा की समुद्री आवाजाही इसी मार्ग से होती है। इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

ईरान-अमेरिका के बीच क्यों बढ़ा तनाव?

ईरान और अमेरिका के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेद हैं।

होरमुज़ जलडमरूमध्य का मुद्दा भी इसी व्यापक तनाव का हिस्सा बन गया है। ईरान अपनी सुरक्षा और राजनीतिक मांगों को लेकर पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है, जबकि अमेरिका भी बातचीत में अपनी शर्तों पर जोर दे रहा है।

ओमान की भूमिका भी अहम

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में ओमान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ओमान दोनों पक्षों के बीच संवाद और मध्यस्थता का माध्यम बनता रहा है। हालांकि, ईरान के ताजा रुख से साफ है कि ओमान के साथ किसी समझौते को वह अमेरिका के साथ अंतिम सहमति के बराबर नहीं मान रहा है।

इसका मतलब है कि होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर वास्तविक समाधान के लिए सीधे ईरान और अमेरिका के बीच किसी व्यापक समझौते की जरूरत पड़ सकती है।

दुनिया की नजरें होरमुज़ पर

होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव पर तेल आयात करने वाले देशों की भी नजर बनी हुई है। यदि यहां से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन ईरान की सख्त शर्तों और अमेरिका की मुआवजे की मांग ने समाधान की राह को कठिन बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष किसी ऐसे समझौते तक पहुंचते हैं जिससे होरमुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही बहाल हो सके।

होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत में अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। लेकिन, दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच अन्य मुद्दों पर भी बातचीत हो रही है।

इसके अलावा, मध्य पूर्व में शांति के लिए भी दोनों देशों के बीच बातचीत हो रही है।