मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन (MPSCSC) द्वारा एआई आधारित फूड ग्रेन एनालाइजर मशीनों को किराए पर लेने के प्रस्ताव को लेकर विवाद गहरा गया है। इस टेंडर में सात वर्षों के लिए मशीनें किराए पर लेने का प्रावधान किया गया है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हें सीधे खरीदना सरकारी खजाने के लिए अधिक किफायती हो सकता है।
हालांकि, टेंडर से जुड़े वित्तीय आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आधिकारिक स्तर पर नहीं हुई है। मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 3 फरवरी 2026 को एआई आधारित फूड ग्रेन एनालाइजर मशीनों के लिए टेंडर जारी किया गया था। टेंडर में मशीनों को सात साल तक किराए पर लेने का प्रस्ताव है। इसके तहत प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 120 दिनों का किराया देना अनिवार्य रखा गया है।
इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब मशीनें खरीदी जा सकती हैं तो लंबे समय तक किराए का विकल्प क्यों चुना गया।
खरीद बनाम किराया
विशेषज्ञों के अनुसार, एक फूड ग्रेन एनालाइजर मशीन की कीमत लगभग 5 लाख रुपये तक हो सकती है। इस आधार पर लगभग 4,000 मशीनें करीब 200 करोड़ रुपये में खरीदी जा सकती हैं।
आलोचकों का तर्क है कि यदि खरीद का विकल्प उपलब्ध है, तो लंबी अवधि के किराया मॉडल की आर्थिक उपयोगिता का स्पष्ट औचित्य सामने आना चाहिए।
टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल
बताया जा रहा है कि टेंडर की वैधता 180 दिनों के लिए निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी और बाद में वैधता बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि इस प्रक्रिया को लेकर वित्त विभाग के स्तर पर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पहले से खरीद का उदाहरण
इस मुद्दे पर यह भी चर्चा है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) और मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड पहले ऐसी मशीनों की खरीद की दिशा में कदम उठा चुके हैं। ऐसे में किराए के मॉडल को लेकर पारदर्शिता और लागत-लाभ विश्लेषण की मांग उठ रही है।
मुख्य बिंदु
- MPSCSC ने AI आधारित फूड ग्रेन एनालाइजर मशीनों के लिए टेंडर जारी किया।
- प्रस्ताव में सात वर्षों तक किराए पर मशीनें लेने की व्यवस्था है।
- हर वर्ष न्यूनतम 120 दिनों का किराया अनिवार्य रखा गया है।
- विशेषज्ञ मशीनों की खरीद को अधिक किफायती विकल्प बता रहे हैं।
- टेंडर प्रक्रिया और लागत को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच या स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट होगा।
भारतीय खाद्य निगम पहले ही ऐसी मशीनें खरीद चुका है। मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने भी 139 मशीनों की खरीदी के लिए टेंडर जारी किया है। मध्य प्रदेश समाचार के अनुसार, यह मामला और विवादित हो सकता है। एमपी न्यूज के लिए यह एक बड़ा मुद्दा है। भोपाल समाचार में यह मामला छाया हुआ है।