दतिया ने फिर दिया झटका: भाजपा का किला दरका, कांग्रेस ने 6056 वोट से दोहराई जीत

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को 6056 वोट से हराया। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का बूथ भी भाजपा हार गई। यह तीन साल में दतिया और ढाई साल में भाजपा की दूसरी उपचुनाव हार रही।

दतिया।
दतिया उपचुनाव ने भाजपा की चुनावी रणनीति और कथित आंतरिक सर्वेक्षणों पर सवाल खड़े कर दिए।

कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6056 वोटों से हराकर सीट अपने नाम कर ली।

 

आशुतोष तिवारी     V/S               घनश्याम सिंह
         हारे                                              जीते

 

दूसरी बड़ी चुनावी हार

इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों में दतिया में भाजपा को दूसरी बड़ी चुनावी हार का सामना करना पड़ा।

वहीं, प्रदेश में भी बीते ढाई साल के भीतर भाजपा लगातार दूसरा विधानसभा उपचुनाव हार गई।

सबसे चर्चित नतीजा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ नंबर-121 से आया।

यहां भी भाजपा पीछे रही। कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले।

नौवें राउंड के बाद घटी बढ़त

हालांकि मतगणना के नौवें राउंड तक कांग्रेस की बढ़त 9519 वोट पहुंच गई थी,

लेकिन बाद के चरणों में यह अंतर घटता गया।

अंततः कांग्रेस ने 6056 वोटों की निर्णायक बढ़त के साथ जीत दर्ज की।

इस बीच मतगणना के दौरान नौवें राउंड में ईवीएम रखने के स्थान को लेकर भाजपा और कांग्रेस एजेंटों के बीच नोकझोंक हुई।

हालांकि पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हो गया।

पनों ने ही धोखा दिया:आशुतोष

हार के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने कहा कि परिणाम की समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि “जो लोग भाजपा को अपनी मां कहते थे, उन्होंने ही धोखा दिया।”

दूसरी ओर, कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने कहा कि भीतरघात का असर जीत के अंतर पर नहीं पड़ा।

कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल

(पीसीसी में सहयोगियों को मिठाई खिलाकर जीत की खुशी मनाते प्रदेश कांग्रेस मीडिया सेल प्रमुख मुकेश नायक।)

जीत के बाद कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल रहा और भोपाल में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने दतिया के मतदाताओं का आभार जताया।

गौरतलब है कि यह सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सहकारी ग्रामीण विकास बैंक घोटाला मामले में दो वर्ष की सजा मिलने के बाद रिक्त हुई थी।

इससे पहले 2023 के विधानसभा चुनाव में भी भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7742 वोटों से हराया था।