महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने पर पीएम मोदी ने मांगी महिलाओं से माफी

नई दिल्ली।

महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए एक तरफ महिलाओं से माफी मांगी, तो दूसरी तरफ विपक्ष पर सीधा और तीखा हमला बोला। उनका 30 मिनट का भाषण भावनात्मक अपील और राजनीतिक संदेश—दोनों का मिश्रण रहा।

🔹 “माताओं-बहनों से माफी”, लेकिन जिम्मेदार कौन?

प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि महिला आरक्षण बिल में संशोधन नहीं हो सका, इसके लिए वे देश की महिलाओं से क्षमा चाहते हैं।
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि “दलहित को देशहित से ऊपर रखने” की कीमत नारी शक्ति को चुकानी पड़ी।

🔹 विपक्ष पर सीधा आरोप: “नारी अधिकार छीने”

PM मोदी ने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और सपा जैसे दलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि:

इन्होंने महिलाओं के अधिकारों को रोका
संसद में बिल गिरने पर खुशी जताई
“परिवारवादी राजनीति” महिलाओं की भागीदारी से डरती है
🔹 बिल क्यों गिरा? आंकड़ों में समझें
पक्ष में वोट: 298
विरोध में: 230
जरूरी बहुमत: 352

➡️ 54 वोट से बिल पास नहीं हो सका

प्रस्ताव में लोकसभा सीटें बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33% आरक्षण देने की बात थी।

🔹 “नारी अपमान नहीं भूलती”—भावनात्मक अपील

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भावनात्मक स्वर अपनाते हुए कहा कि नारी शक्ति अपने अपमान को कभी नहीं भूलती। उन्होंने इसे महिलाओं के “स्वाभिमान पर चोट” बताया।

🔹 परिसीमन पर भी घमासान

PM ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह परिसीमन को लेकर भ्रम फैला रहा है।
सरकार का दावा है कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बना रहा है।

🔹 “हम हारे नहीं, वक्त का इंतजार”

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।
पीएम ने कहा—“संख्याबल आज नहीं था, लेकिन प्रयास जारी रहेगा”

माफी से ज्यादा संदेश

यह संबोधन सिर्फ माफी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला आरक्षण को लेकर सियासी लड़ाई को और तेज करने का संकेत भी दे गया। अब यह मुद्दा संसद से निकलकर सीधे जनता और खासकर महिला वोटर्स के बीच पहुंच चुका है।

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