हैदराबाद की शान बढ़ाने,मांडू की पहचान नष्ट करने की कवायद

धार । हैदराबाद के बॉटेनिकल गार्डन में प्रत्यारोपण के नाम पर विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मांडू से खुरासानी इमली के वृक्षों को बड़ी संख्या में उजाड़े जाने का मामला सामने आया है। यहां 11 पेड़ों को उखाड़े जाने की अनुमति के नाम पर कई वृक्षों को धराशायी कर दिया गया।

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार,हैदराबाद के एक पर्यावरण रामदेव राव अपने नगर के 350 एकड़ रकबे में एक बॉटनिकल गार्डन तैयार कर रहे हैं। वह इसमें करीब 400 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं। इस गार्डन का नाम उन्होंने ग्रीन साम्राज्य यानी ग्रीन किंगडम रखा है। इसमें मांडू की खुरासानी इमली को भी शामिल किया गया।

रामदेव राय चाहते हैं कि उनके गार्डन में खुरासानी के बड़े वृक्ष सीधे प्रत्यारोपित हों ताकि इनके बड़े होकर फल देने के इंतजार से बचा जा सके। यह प्रत्यारोपण स्पेन की प्रणाली से किया जाना है। इसके लिए मांडू के 11 वृक्षों का चयन किया गया। इन्हें खराब बताकर इन्हें उखाड़े जाने व परिवहन कर हैदराबाद ले जाने की अनुमति भी राव ने हासिल की।

बताया जाता है कि अनुमति की आड़ में खुरासानी इमली के कई पेड़ धराशायी कर दिए गए। ये कार्य मांडू और आसपास के ग्राम सूलीबयड़ी, मेहंदीखेड़ी ओर पन्नाला में किया गया। इससे वन क्षेत्र की जैव विविधता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

वृक्षों को उखाड़े जाने व इन्हें जस का तस अन्यत्र प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया काफी जटिल है। इससे अधिक इनका परिवहन करना और महंगा व मुश्किलभरा होता है। इसके चलते 11 की जगह कई वृक्षों को उखाड़ दिया व छंटाई के नाम पर नष्ट कर दिया गया।

वृक्षों को इस तरह उजाड़े जाने से स्थानीय ग्रामीणों व पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश है।

दरअसल, खुरासानी मांडू की पहचान ही नहीं बल्कि यह स्थानीय जनजाति वर्ग के लोगों के रोजगार का एक बड़ा माध्यम भी है।

आदिवासी खुरासानी को मांडू व आसपास के इलाकों में बेचकर अपनी जीविका चलाते रहे हैं।

खुरासानी इमली की कहानी
खुरासानी इमली के पौधे 15 वीं शताब्दी में आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी को अफगानिस्तान के खुरासान के सुल्तान ने भेंट किये थे। तभी से खुरासानी इमली मांडू और आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है। मूलरूप से यह प्रजाति अफ्रीका देश की है।

ये इमली देखने में तो लौकी व एक बड़े खीरा की तरह है लेकिन औषधीय गुणों से भरपूर है। इमली मांडू और आसपास के इलाकों में ही मिलती है। यह हैदराबाद के ग्रीन साम्राज्य गार्डन की शोभा बने,लेकिन मांडू की जैव विविधता को नष्ट कर यह काम किया जाए। यह बात स्थानीय लोगों को रास नहीं आ रही है।

…. जहां तक मुझे जो जानकारी है,जितने वृक्षों की अनुमति दी गई,उतने ही वृक्षों का उखाड़ा जा रहा है। अन्य वृक्षों को नष्ट किए जाने की बात गलत है।
जी.डी.वरवड़े डीएफओ धार वन वृत

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