मप्र विधानसभा में ‘औकात’ पर बवाल: सियासी तल्खी के बीच CM की माफी से थमा तूफान

रवि अवस्थी,भोपाल।

मध्य प्रदेश की राजनीति में बुधवार का दिन सदन की गरिमा पर भारी पड़ता दिखा। राज्यपाल के अभिभाषण पर चल रही चर्चा अचानक उस वक्त तीखी नोकझोंक में बदल गई, जब संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को “औकात में रहने” की नसीहत दे दी।

स टिप्पणी से सदन में हंगामा खड़ा हो गया और कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी। अंततः मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं माफी मांगकर विवाद का पटाक्षेप किया।

अडानी मुद्दे से भड़की चिंगारी

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने सिंगरौली में अडानी ग्रुप से जुड़े खनन परियोजनाओं और कथित रूप से बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार “अडानी के दबाव” में काम कर रही है और निर्णय “कॉरपोरेट चेंबर” में लिए जा रहे हैं।

इन आरोपों पर संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने सिंघार को चुनौती दी कि यदि आरोपों के तथ्य हैं तो उन्हें सदन में प्रस्तुत करें।

इसी दौरान तीखी बहस के बीच विजयवर्गीय ने “औकात में रहने” की टिप्पणी कर दी, जिसने आग में घी का काम किया।

तीन बार स्थगित हुई कार्यवाही, रणनीति भी बेअसर

विवाद बढ़ने पर सदन की कार्यवाही तीन बार 10–15 मिनट या उससे अधिक समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

अध्यक्ष के कक्ष में सत्ता और विपक्ष के नेताओं के बीच सुलह की कोशिशें भी हुईं, लेकिन शुरुआती दौर में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।

‘दुख’ बनाम ‘खेद’: शब्दों पर अटका सियासी संवाद

तीसरी बार सदन शुरू होने पर विजयवर्गीय ने अपने शब्दों पर “दुख” व्यक्त किया, लेकिन “खेद” शब्द का प्रयोग नहीं किया।

उन्होंने कहा कि 35 वर्षों के संसदीय जीवन में उन्हें ऐसा क्रोध पहले कभी नहीं आया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिंघार की “बॉडी लैंग्वेज” से उन्हें उत्तेजना हुई।

विजयवर्गीय ने व्यक्तिगत रिश्तों का हवाला देते हुए कहा कि वे सिंघार को भतीजे समान मानते हैं और धार जिले के प्रभारी मंत्री के नाते उनके संबंध मधुर रहे हैं।

CM की पहल से थमा विवाद

विपक्ष “खेद” शब्द के स्पष्ट प्रयोग की मांग पर अड़ा रहा। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं खड़े होकर दिनभर की घटनाओं पर विपक्ष से माफी मांगी।

इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी कहा कि यदि उनकी किसी अभिव्यक्ति या हावभाव से सदन की गरिमा को ठेस पहुंची हो तो वे खेद प्रकट करते हैं।

अध्यक्ष की दो-टूक: दोनों पक्ष जिम्मेदार
सदन के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा का इतिहास गरिमापूर्ण रहा है। आज की स्थिति के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष-दोनों जिम्मेदार हैं।

फिलहाल, मुख्यमंत्री की पहल ने तत्काल संकट टाल दिया है, लेकिन यह सवाल कायम है-क्या सदन में संवाद की मर्यादा भविष्य में बनी रह पाएगी?

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