** औद्योगिक निवेश की मप्र में जमीन तैयार ** GIS से पहले ₹3.50लाख Cr.के प्रस्ताव ** नर्मदापुरम को लेकर निवेशकों की कतार ** सरकार को बढ़ाना पड़ा पार्क का रकबा ** 884 एकड़ का हुआ मोहासा-बाबई पार्क ** UK,जर्मनी GIS-25 में पार्टनर बनने राजी
Bhopal,5 DEC.2024(janprachar.com).मप्र में औद्योगिक निवेश बढ़ाने को लेकर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के प्रयास अब फलीभूत होना शुरू हो गए हैं।आलम यह कि जीआइएस से पहले ही निवेशकों की कतार लगीं तो सरकार को मोहासा-बाबई औद्योगिक पार्क का रकबा बढ़ाकर साढ़े 8 सौ एकड़ से ज्यादा करना पड़ा.यही नहीं,प्रदेश में पहली बार यूके व जर्मनी जीआइएस के पार्टनर होंगे।
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औद्योगिक कंपनियां कतार में
नर्मदापुरम में 7 दिसंबर को छठवीं रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव होगी,लेकिन इससे पहले ही मोहासा—बाबई औद्योगिक पार्क में उद्योग लगाने को लेकर 30 से ज्यादा औद्योगिक कंपनियां कतार में हैं। इनके प्रस्तावों को देखते हुए सरकार को इस पार्क का रकबा बढ़ाकर 884 एकड़ करना पड़ा। एक दिन पहले ही पार्क के लिए 442 एकड़ जमीन को और मंजूरी दी गई। इस पार्क में बिजली व नवकरणीय ऊर्जा से जुड़े उपकरण तैयार होंगे।
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बेहतर कनेक्टीविटी
नर्मदापुरम संभाग में रीजनल इंडस्ट्रियल कॉनक्लेव पहली बार हो रही है।यह औबेदुल्लागंज से बैतूल फोरलेन 46, भोपाल-नागपुर एनएच 69 से सीधा जुड़ा है। इटारसी जंक्शन भी नजदीक है। इस बेहतर कनेक्टीविटी को देखते हुए इस संभाग में निवेश के अधिक इच्छुक हैं।यह तीसरा मौका है जब सरकार को मोहासा-बाबई पार्क का रकबा बढ़ाना पड़ा। पूर्व में मोहासा पार्क के लिए सिर्फ 1678 एकड़ जमीन आरक्षित थी। बाद में इसमें 227 एकड़ जमीन और जोड़कर इसका क्षेत्रफल 441 एकड़ किया गया। अब नए निवेशकों को देखते हुए 442 एकड़ और जमीन पार्क के लिए आवंटित करने का निर्णय राज्य की डॉ मोहन यादव सरकार ने लिया है।
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जीआइएस में पार्टनर बनने को राजी
औद्योगिक निवेश को लेकर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आगामी फरवरी में भोपाल में होना है,लेकिन इससे पहले ही शुरू की गई श्रृंखलाबद्ध रीजनल इंडस्ट्रियल कॉनक्लेव से प्रदेश में निवेश का वातावरण निर्मित हुआ है। वहीं,औद्योगिक निवेश को लेकर मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा भी काफी सफल मानी जा रही है। इसका आकलन इसी बात से किया जा सकता है कि पहली बार यूके व जर्मनी जीआइएस में पार्टनर बनने को राजी हुए। दोनों देशों से मिली इस सहमति से बड़े स्तर पर विदेशी निवेश का रास्ता खुलेगा।
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सराहनीय प्रयास
देखा जाए तो मप्र के औद्योगिक निवेश को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के प्रयास अब परवान चढ़ रहे हैं। जीआइएस से पहले ही मप्र को मिले साढ़े तीन लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव इसकी बानगी है। इनमें विदेश से ही 78 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। मप्र में निवेश को लेकर बना यह माहौल रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। यानी एक पंथ दो काज वाला यह प्रयास सराहनीय कहा जा सकता है।