नियमों पर सवाल: GAD को ​दरकिनार कर कृषि सचिव ने दूसरे विभाग में सीधे की महिला अफसर की पदस्थापना

रवि अवस्थी,भोपाल।
मध्यप्रदेश शासन के कृषि विभाग द्वारा जारी एक पदस्थापना आदेश ने प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला जीवाजी कृषि विश्वविद्यालय जैव रसायन की सहायक प्राध्यापक डॉ. पूजा सिंह की उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में पुन: पदस्थापना से जुड़ा है।

आदेश के अनुसार डॉ. पूजा सिंह को “संपर्क अधिकारी” के रूप में कार्य करने के लिए फिर से उद्यानिकी विभाग में नियुक्त किया गया है।

खास बात यह कि संपर्क अधिकारी का कोई पद उद्यानिकी विभाग में सृजित ही नहीं है।

हालांकि प्रशासनिक हलकों में इस आदेश को लेकर प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र पर चर्चा तेज हो गई है।

पहले वापस भेजी गई थीं सेवाएं

सूत्रों के मुताबिक डॉ. पूजा सिंह पूर्व में उद्यानिकी विभाग में संपर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत थीं।

उनकी कार्यशैली को लेकर विभागीय स्तर पर सवाल उठने के बाद हाल ही में उनकी सेवाएं वापस जीवाजी कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर को लौटा दी गई थीं।

इसके बाद कृषि विभाग द्वारा पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए उन्हें दोबारा उद्यानिकी विभाग में कार्य करने के लिए आदेशित किया गया।

पदस्थापना प्रक्रिया पर उठे सवाल

प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि सामान्य तौर पर किसी भी विभाग में प्रतिनियुक्ति अथवा पदस्थापना संबंधी अंतिम आदेश सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के माध्यम से जारी किए जाते हैं। संबंधित विभाग केवल सहमति या प्रस्ताव भेज सकता है।

ऐसे में कृषि विभाग द्वारा सीधे आदेश जारी किए जाने को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिकारों की व्याख्या पर सवाल उठ रहे हैं।

आदेश की भाषा पर भी चर्चा

आदेश में “पदस्थापना” शब्द की जगह “कार्य करने हेतु आदेशित” जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है। जानकारों का मानना है कि यह तकनीकी रूप से आदेश को अलग स्वरूप देने की कोशिश हो सकती है।

हालांकि अब तक सरकार या संबंधित विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

इस मामले में कृषि सचिव निशांत वरवड़े से भी उनकी प्रतिक्रिया चाही गई,लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

प्रशासनिक हलकों में बढ़ी चर्चा

मंत्रालय और विभागीय स्तर पर इस आदेश को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कई अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है तो भविष्य में इस तरह के आदेश प्रशासनिक विवाद का कारण बन सकते हैं।

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