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जलाने से पहले दशानन के सिरों पर लिखीं 10 मांगें,जताया आक्रोश
मध्य प्रदेश
जलाने से पहले दशानन के सिरों पर लिखीं 10 मांगें,जताया आक्रोश
सीहोर में 25 गांवों के किसानों ने बिजली विभाग के खिलाफ 10 मांगों वाला रावण जलाया। घायल किसान को ₹25 लाख मुआवजा, सरकारी नौकरी और FIR की मांग उठाई।
October 21, 2026
Ravi Awasthi
सीहोर।
दशहरे पर रावण के पुतले का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है,
लेकिन सीहोर में किसानों ने इसे बिजली विभाग के खिलाफ विरोध का माध्यम बना दिया।
यहां किसानों ने दस सिर वाला रावण तैयार किया और उसके हर सिर पर अपनी एक-एक मांग लिख दी।
इसके बाद रावण का दहन कर बिजली व्यवस्था और विभागीय अधिकारियों की कथित लापरवाही के खिलाफ आक्रोश जताया।
प्रदर्शन में सीहोर जिले के 25 गांवों के किसान शामिल हुए।
प्रदर्शन में
किसानों ने बरबेली गांव के एक किसान को करंट
लगने से गंभीर रूप से घायल होने के मामले में न्याय की मांग
उठाई।
किसानों की प्रमुख मांग है कि घायल किसान सतीश के परिजनों को ₹25 लाख का मुआवजा दिया जाए
और उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।
साथ ही, जिन बिजली अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है,
उनके खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए। किसानों का आरोप है कि
खेतों में झूलते 11 केवी और एलटी बिजली के तारों तथा खंभों की समस्या की शिकायत पहले भी की गई थी,
लेकिन समय पर सुधार नहीं हुआ।
किसानों का कहना है कि इसी लापरवाही के कारण हादसा हुआ।
हालांकि, इस मामले में जिम्मेदारी और लापरवाही का अंतिम निर्धारण जांच के आधार पर ही होगा।
चार महीने से आंदोलन, अब रावण दहन से जताया विरोध
किसानों के मुताबिक, वे पिछले चार महीने से सीहोर और आसपास के क्षेत्रों में इस मामले को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
उनका कहना है कि बिजली के झूलते तार और खराब व्यवस्था
खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
ऐसे में शिकायत मिलने के बाद समय पर सुधार और सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
किसानों ने अपनी मांगों को अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर ज्ञापन भी दिए हैं।
इनमें मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, प्रभारी मंत्री, मानव अधिकार आयोग, महिला आयोग,
पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की बात कही गई है।
इसके बावजूद मांगें पूरी नहीं होने का आरोप लगाते हुए किसानों ने दशहरे पर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।
दस सिर, दस मांगें; बिजली विभाग की जवाबदेही पर सवाल
प्रदर्शन का सबसे खास पहलू दस सिर वाला रावण रहा।
किसानों ने उसके दस सिरों पर अपनी प्रमुख मांगें
और बिजली व्यवस्था से जुड़े सवाल लिखे।
इसके बाद पुतले का दहन किया गया।
इस तरीके से किसानों ने अपने विरोध को सार्वजनिक रूप दिया
और यह संदेश देने की कोशिश की कि उनके लिए मामला केवल मुआवजे का नहीं,
बल्कि बिजली सुरक्षा और जवाबदेही का भी है।
खेतों में बिजली के तारों की ऊंचाई, खंभों की स्थिति और शिकायतों पर समय पर कार्रवाई
जैसे मुद्दे ग्रामीण सुरक्षा से सीधे जुड़े हैं। यदि किसानों की शिकायतों की पुष्टि होती है,
तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग ने पहले मिली सूचनाओं पर क्या कार्रवाई की थी।
₹25 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग
किसानों की प्रमुख मांग घायल किसान सतीश को ₹25 लाख का मुआवजा और
सरकारी नौकरी देने की है। इसके साथ वे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR
दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता
और जिम्मेदारी तय नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, प्रदर्शन जारी रहेगा।
जरूरत पड़ने पर भोपाल में भी आंदोलन किया जाएगा। अब प्रशासन और बिजली विभाग के \
सामने चुनौती है कि किसानों की शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें,
बिजली सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को दूर करें और हादसे में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।
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