कलेक्टर गए,अब ट्रस्ट कटघरे में: विधानसभा में खुली आनंदधाम की ‘जमीन कहानी’

रवि अवस्थी,भोपाल।
अशोकनगर से बीते माह हटाए गए पूर्व कलेक्टर आदित्य सिंह पर ईशानगर की आनंदधाम संस्था से 3 करोड़ रुपए मांगने का आरोप लगा।

आनन-फानन में कलेक्टर तो हटा दिए गए,लेकिन अब आनंदधाम खुद विधानसभा में अतिक्रमण के आरोपों में घिर गई है।

सरकार ने सदन में स्वीकार किया कि ट्रस्ट के कब्जे में शासकीय और वन भूमि भी पाई गई है।

कलेक्टर पर आरोप, फिर पलटी संस्था

बीते माह अशोकनगर के तत्कालीन कलेक्टर आदित्य सिंह को हटाया गया। उन पर ईशानगर स्थित आनंदधाम संस्था से 3 करोड़ रुपये मांगने का आरोप लगा। हालांकि बाद में संस्था ने स्वयं ही इन आरोपों का खंडन कर दिया।

सूत्रों का दावा है कि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी ही टकराव की वजह बनी।

संस्था को यह भरोसा था कि उसके शीर्ष स्तर तक संबंध हैं। वह बीते वर्ष 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धाम में आमंत्रित कर चुकी है।

विधानसभा में बड़ा खुलासा

गुरुवार को विधायक हरिबाबू राय के प्रश्न के जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने माना कि आनंदधाम ट्रस्ट के नाम कुल 2105.955 हेक्टेयर भूमि दर्ज है।

लेकिन इसके साथ ही यह भी स्वीकार किया गया कि ग्राम बांसाखेड़ी की शासकीय भूमि (सर्वे क्रमांक 267, रकबा 0.618 हे.) तथा वन विभाग के ईसागढ़ वनखंड के कक्ष क्रमांक RF-25 की 3.52 हेक्टेयर भूमि पर ट्रस्ट का अतिक्रमण है।

11 गांवों में फैली जमीन

ईसागढ़ तहसील के 11 गांवों में ट्रस्ट के नाम 1948.181 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। इनमें आनंदपुर, जमडेरा, शांतपुर, दयालपुर और बहेरिया उर्फ रूपनगर प्रमुख हैं।

अशोकनगर तहसील में बांसाखेड़ी, पंवारगढ़ और कस्तां अशोकनगर में 157.774 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। दोनों मिलाकर कुल जमीन 2105 हेक्टेयर से अधिक बताई गई।

अब प्रशासन की परीक्षा

सवाल यह है कि-इतनी बड़ी जमीन एक निजी ट्रस्ट के नाम कैसे दर्ज हुई? शासकीय और वन भूमि पर अतिक्रमण पर क्या कार्रवाई होगी?

क्या राजस्व और वन विभाग की जवाबदेही तय होगी? एक कलेक्टर पद से हट चुके हैं।

अब नजर मौजूदा जिला प्रशासन पर है-क्या वह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगा या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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