MP: खेत,हाईवे और सदन तक… गोवंश पर सियासत गरम

भोपाल।

निराश्रित गोवंश का मुद्दा एक बार फिर मध्य प्रदेश विधानसभा में तीखे राजनीतिक टकराव का कारण बना।

सवाल सिर्फ गौशालाओं का नहीं, बल्कि किसानों की फसल, हाईवे पर बढ़ते हादसों और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है।

“किसान टॉर्च लेकर रातभर पहरा देते हैं”- अजय सिंह 

यह मुद्दा कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने ध्यानकर्षण के जरिए उठाया। उन्होंने कहा- किसान अपनी फसल बचाने के लिए रातभर खेतों में टॉर्च लेकर गश्त करने को मजबूर हैं।

उन्होंने पूछा कि राज्य में कितनी गौशालाएं बंद पड़ी हैं। उनकी वास्तविक स्थिति क्या है। उनका सुझाव था कि पंचायतों को जिम्मेदारी देकर समस्या का अस्थायी समाधान निकाला जाए।

सरकार का दावा: 25 लाख जुर्माना, 4 लाख गोवंश आश्रित

पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने  कहा कि सड़कों पर घूमने वाले पशुओं के मालिकों पर अब तक 25 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने बताया:

* राज्य की गौशालाओं में 4 लाख से अधिक गोवंश आश्रित हैं।

* 25 जिलों में नई गौशालाओं के लिए स्थान चिन्हित किए गए हैं।

* जबलपुर, रायसेन, दमोह, सागर, अशोकनगर, खरगोन और रीवा में टेंडर जारी।

* प्रत्येक नई गौशाला की क्षमता 5000 गोवंश की होगी।

सरकार “गोवर्धन धाम” योजना के तहत स्वावलंबी गौशालाओं का मॉडल विकसित कर रही है।जिससे अगले दो वर्षों में सुधार का दावा किया गया।

विपक्ष के तीखे आरोप

पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने सरकार पर सदन में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया।

कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाहा ने कहा कि सड़कों पर लगातार हादसे हो रहे हैं, जबकि गौशालाओं की हालत दयनीय है।

हेमंत कटारे ने गंभीर आरोप लगाया कि फसल बचाने के लिए कुछ किसान खेतों में करंट तक लगा देते हैं।

जिससे गोवंश और कई बार बच्चे भी झुलस जाते हैं। उन्होंने गोवंश की निगरानी के लिए GPS ट्रैकर लगाने का सुझाव दिया।

सत्ता पक्ष की दलीलें और सुझाव

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सुझाव दिया कि यदि गोवंश छोड़ने वालों को 40 रुपये प्रतिदिन प्रोत्साहन दिया जाए, तो समस्या काफी हद तक सुलझ सकती है।

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि गो संवर्धन किसी एक दल का विषय नहीं।

बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने माना कि सड़क पर गाय होने के लिए व्यवस्था जिम्मेदार है, पशु नहीं।

असली सवाल: योजना बनाम जमीन हकीकत

सरकार नई गौशालाओं, जुर्माने और निगरानी की बात कर रही है, जबकि विपक्ष जमीनी हालात पर सवाल उठा रहा है।

अब देखने वाली बात यह है कि “गोवर्धन धाम” जैसी योजनाएं खेत और हाईवे पर दिख रही समस्या को कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से कम कर पाती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *