बरगी क्रूज हादसे में नया खुलासा: खेती-किसानी से जुड़ी कंपनी चला रही थी पर्यटन क्रूज

जबलपुर।
बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई थी, अब उससे जुड़ी आउटसोर्स व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच में सामने आया है कि जिस क्रूज का संचालन किया जा रहा था, उसकी मैनपावर व्यवस्था ऐसी कंपनी के पास थी, जिसका मुख्य काम कृषि क्षेत्र में गेहूं सर्वेयर और गुणवत्ता निरीक्षक उपलब्ध कराना है।

सूत्रों के मुताबिक, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के बरगी मैकल रिसोर्ट में तैनात अधिकांश आउटसोर्स कर्मचारी भोपाल की एक निजी कंपनी ने उपलब्ध कराए थे।

एमपी नगर जोन -1 स्थित ज्योति काम्पलेक्स की एक छोटी सी दुकान में यह कंपनी संचालित है। हादसे के समय क्रूज चला रहे पायलट महेश पटेल और उनके सहयोगी भी इसी कंपनी के कर्मचारी बताए जा रहे हैं।

पर्यटन नहीं, खेती-किसानी से जुड़ा है कंपनी का काम

सामने आया है कि निजी कंपनी मुख्य रूप से मानव संसाधन और आउटसोर्सिंग सेवाएं देने वाली है। इसाका प्रमुख कार्य कृषि विभागों और एजेंसियों के लिए सर्वेयर, गुणवत्ता निरीक्षक और वेयरहाउस स्टाफ उपलब्ध कराना रहा है।

कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, वह मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन और राज्य सहकारी विपणन संघ जैसी संस्थाओं के लिए गेहूं गुणवत्ता परीक्षण और सर्वेयर उपलब्ध कराती रही है।

क्रूज संचालन के अनुभव पर उठे सवाल

 

कंपनी के प्रोफाइल में जल परिवहन, पर्यटन या क्रूज संचालन से जुड़ा कोई विशेष अनुभव दर्ज नहीं है। इसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि पर्यटन विभाग ने किस आधार पर ऐसी कंपनी को मैनपावर व्यवस्था सौंपी।

हालांकि, पर्यटन विभाग के अधिकारी यह दावा करते रहे हैं कि महेश को क्रूज चलाने का दस साल का अनुभव रहा है। फसल सर्वेयर कंपनी को पर्यटन का काम कैसे मिला,अब इसे लेकर पर्यटन निगम के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बता दें कि पर्यटन विकास निगम अपने मूल कार्य को छोड़कर निर्माण जैसे क्षेत्र में भी इसी तरह के अभिनव प्रयोग कर रहा है। वह सरकारी निर्माण ठेके हासिल कर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को काम उपलब्ध कराता है।

सुरक्षा और प्रशिक्षण की जांच

हादसे के बाद जांच एजेंसियां अब कर्मचारियों के प्रशिक्षण, सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाओं की पड़ताल कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का पर्याप्त प्रशिक्षण दिया गया था या नहीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के दौरान कई यात्री लाइफ जैकेट तलाशते नजर आए थे, जिससे सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल उठे हैं।

सिर्फ सप्लायर का नाम बदला,कर्मचारी नहीं: दावा
सूत्रों के मुताबिक,कंपनी का दावा है कि बरगी मेकल रिसोर्ट में संबंधित कर्मचारी पहले से पर्यटन निगम में कार्यरत थे और उनका चयन कंपनी ने नहीं किया था। अक्टूबर 2025 से वह केवल इन कर्मचारियों का पेरोल मैनेजमेंट देख रही थी।

यानी ठेका परिवर्तन में सिर्फ मैनपॉवर सप्लायर कंपनी का नाम कागज में बदला,बाकि व्यवस्था पूर्ववत रहीं। यह एक और बड़ी धांधली के संकेत है। सवाल यह भी उठ रहे कि जब बरगी मैकल रिसॉर्ट में कर्मचारी पहले से तैनात थे,तो फिर निगम को नए सिरे से मैनपॉवर लेने की जरूरत क्यों पड़ी?

न्यायिक आयोग कैसे करे जांच?

मध्यप्रदेश सरकार ने हादसे के करीब दस दिन बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज संजय द्विवेदी (Sanjay Dwivedi in Photo)) की अध्यक्षता में गठित एक सदस्यीय आयोग तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। आयोग हादसे से जुड़े सुरक्षा, संचालन और प्रशासनिक पहलुओं की जांच करेगा। हालां​कि मैन पॉवर सप्लाई वाला बिंदु आयोग के जांच एजेंडे में शामिल नहीं हैं,ऐसे में यह उम्मीद कम है कि आयोग इस धांधली की जांच करेगा।

हादसे की इस तस्वीर ने पूरे देश को झकझोरा

 हादसे में 13 लोगों की मौत हुर्ह। इनमें एक मृत मॉ और उसकी छाती से चिपके चार साल के बेटे की तस्वीर सामने आई। इसने पूरे देश को झकझोर दिया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *