
बताया जाता है कि अनुमति की आड़ में खुरासानी इमली के कई पेड़ धराशायी कर दिए गए। ये कार्य मांडू और आसपास के ग्राम सूलीबयड़ी, मेहंदीखेड़ी ओर पन्नाला में किया गया। इससे वन क्षेत्र की जैव विविधता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
वृक्षों को इस तरह उजाड़े जाने से स्थानीय ग्रामीणों व पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश है।
खुरासानी इमली के पौधे 15 वीं शताब्दी में आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी को अफगानिस्तान के खुरासान के सुल्तान ने भेंट किये थे। तभी से खुरासानी इमली मांडू और आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है। मूलरूप से यह प्रजाति अफ्रीका देश की है।