कटनी में SRNMFOI को बड़ा झटका: 10 एकड़ जमीन पर दावा खारिज

कटनी।
कटनी जिले में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे और नामांतरण के मामले में अपर कलेक्टर कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।स्प्रिचुअल रीजन नरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SRNMFOI) के नाम दर्ज की गई जमीन को निरस्त करते हुए उसे दोबारा शासन के रिकॉर्ड में दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।

अपर कलेक्टर कोर्ट का बड़ा फैसला

अपर कलेक्टर कोर्ट ने पाया कि संबंधित भूमि पूर्व से शासकीय मद में दर्ज थी, लेकिन बाद में विभिन्न दस्तावेजों और नामांतरण प्रक्रियाओं के जरिए फाउंडेशन के नाम दर्ज कर दी गई। मामले की जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद कोर्ट ने फाउंडेशन का दावा खारिज कर दिया।

आदेश में कहा गया कि संबंधित खसरा नंबर 143 रकबा 3.02 हेक्टेयर और खसरा नंबर 164 रकबा 1.47 हेक्टेयर भूमि को पुनः सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। साथ ही अनुविभागीय अधिकारी को रिकॉर्ड दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

जमीन फिर से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने के निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया था कि शासकीय भूमि को गलत तरीके से निजी संस्था के नाम दर्ज कराया गया। वहीं फाउंडेशन की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर सके।

कोर्ट के इस फैसले को जिले में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों और संदिग्ध नामांतरण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

एक निजी विवि से जुड़ा है फाउंडेशन
सूत्रों का दावा है कि संस्थान एक निजी विवि से संबंद्ध है। जो धार्मिक शिक्षा की आड़ में डिग्री व डिप्लोमा पाठ्यक्रम की डिग्रियां भी धड़ल्ले से बांट रहा है। यूजीसी ने उक्त विवि को करीब छह माह पहले डिफाल्टर घोषित किया।

यहां तक कि उसे अपनी वेबसाइट दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए,लेकिन आयोग के निर्देशों को नजर अंदाज कर विवि विज्ञापन प्रकाशित कर विद्यार्थियों को लगातार भ्रमित कर रहा है।

हैरत की बात यह कि मप्र का उच्च शिक्षा विभाग एवं सरकार के जिम्मेदार लोग इस मामले में आंख बंद किए हुए हैं।

See also  उत्तरी उत्तराखंड में 100 रुपये के स्टांप पर बेची सरकारी जमीन, 200 अवैध इमारतों को बुलडोजर से ध्वस्त करने का आदेश

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *