चुनाव कार्यक्रम:कठिन सीटों पर बीजेपी को ज्यादा प्रचार का मौका

भोपाल। लाख जतन के बाद बीजेपी पिछले विधानसभा चुनाव में आदिवासी मतदाताओं को अपने पाले में पूरी तरह ला पाने में नाकाम रही। इसके चलते वर्ष 2018 के चुनाव के मुकाबले उसकी महज 8 सीटों का ही इजाफा हो सका और उसे कुल 24 सीट मिली। 22 सीट कांग्रेस के खाते में तो एक निर्दलीय यानी भाप पार्टी के खाते में गई।

लोकसभा चुनाव में भी आदिवासी बाहुल्य विशेषकर गौंड जनजाति बाहुल्य अंचल में बीजेपी का चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है,लेकिन आज घोषित चुनाव कार्यक्रम ने उसकी मुश्किलों को कुछ हद तक आसान कर दिया है। पार्टी को आदिवासी बाहुल्य सीटों पर प्रचार का अवसर अधिक मिलेगा। जानते हैं कैसा है प्रचार का कार्यक्रम
लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश के दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस चुनाव प्रचार की रणनीति में भी जुट गए हैं। विंध्य और महाकोशल की सीटों पर पहले दो चरणों यानी 19 और 26 अप्रैल को चुनाव होने हैं। ऐसे में दोनों दलों का प्रचार अभियान पहले इन्हीं सीटों पर होगा।

दूसरे चरण में छिंदवाड़ा सीट भी शामिल है। कांग्रेस 2019 में अकेली यही सीट जीत पाई थी। मंडला सीट पर भी दूसरे चरण में मतदान होना है। यह सीट अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित है जहां से केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते चुनाव लड़ रहे हैं।

वह पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे, इसलिए कांग्रेस इस सीट को अपने लिए आसान मान रही है। आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित खरगोन, रतलाम, धार में चौथे चरण यानी 13 मई को मतदान होना है। आदिवासी बहुल खंडवा सीट भी इसमें शामिल है। ऐसे में दलों को इन सीटों पर प्रचार के लिए 56 दिनों का समय मिलेगा।

विंध्य और महाकोशल की सीटों पर पहले दो चरणों यानी 19 और 26 अप्रैल को चुनाव होने हैं। दूसरे चरण में छिंदवाड़ा सीट भी शामिल है। कांग्रेस 2019 में अकेली यही सीट जीत पाई थी। मंडला सीट पर भी दूसरे चरण में मतदान होना है। यह सीट अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित है

आरक्षित सीटों की स्थिति
पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी चुनौती दी थी। विधानसभा चुनाव में इस वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों में 22 में कांग्रेस जीती थी।

ऐसे में भाजपा इन सीटों पर अधिक ध्यान लगाने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और देश के बड़े आदिवासी नेताओं की सभाएं यहां पर भाजपा कराएगी। इस अंचल में जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) भी भाजपा के लिए चुनौती खड़ी करता रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *