स्टर्लिंग ग्लोब ग्रांड में शीतला माता प्राण प्रतिष्ठा 10 अप्रैल को,दिनभर होंगे धार्मिक आयोजन

रवि अवस्थी,भोपाल।
राजधानी भोपाल में धार्मिक आस्था का माहौल बनने जा रहा है। स्टर्लिंग ग्लोब ग्रांड फेस-3 स्थित श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में शीतला माता जी की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा।

यह आयोजन 10 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को किया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए दिनभर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम रखे गए हैं।

समारोह के मुख्य यजमान श्रीमती योगिता एवं संजय विजयवर्गीय हैं। यजमान विजयवर्गीय दंपत्ति ने बताया​ कि कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8 बजे कलश यात्रा से होगी।

इसके बाद हवन-पूजन, नगर भ्रमण, प्राण प्रतिष्ठा और अंत में भंडारा प्रसादी का आयोजन किया जाएगा।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से परिवार सहित शामिल होने की अपील की है।

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स्टर्लिंग ग्लोब ग्रांड फेस-3

स्टर्लिंग ग्लोब ग्रांड फेस-3,जाटखेड़ी रोड होशंगाबाद मार्ग स्थित प्रसिद्ध शनि मंदिर से महज साढ़े तीन सौ मीटर की दूरी पर है। इस मार्ग पर यह पहली कालोनी है।

इसका प्रवेश द्वार हनुमान नगर गेट एक के ठीक सामने है। मंदिर की स्थापना स्टर्लिंग ग्लोब ग्रांड फेस-3 (डुपलेक्स) परिसर में नर्मेदश्वर मंदिर के समीप ही की जा रही है।

नए मंदिर को भी भव्य स्वरूप प्रदान किया गया है। मंदिर निर्माण को ​लेकर कालोनीवासियों में हर्ष व्याप्त है।

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📅 प्रमुख कार्यक्रम:

कलश यात्रा: सुबह 08:00–09:00 बजे
हवन पूजन:          09:00–12:00 बजे
नगर भ्रमण:         03:00–04:00 बजे
प्राण प्रतिष्ठा:         04:30–06:00 बजे
भंडारा प्रसादी:     07:30–10:30 बजे(PM)

(कार्यक्रम स्थल: श्री नर्मदेश्वर महादेव मंदिर, स्टर्लिंग ग्लोब ग्रांड फेस-3, नर्मदापुरम रोड, भोपाल)

🙏 शीतला माता कौन हैं ?

शीतला माता (Sheetala Mata) हिंदू धर्म में शीतला माता को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है।

विशेष रूप से चेचक (माता), बुखार और संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए उनकी पूजा की जाती है।

वैवाहिक कार्यक्रम में माता पूजन के लिए ज्यादातर श्रद्धालु शीतला माता की ही पूजा करते हैं।

🌼 शीतला माता का स्वरूप

माता को आमतौर पर गधे (खच्चर) पर सवार दिखाया जाता है।

हाथ में झाड़ू, कलश और नीम की पत्तियां रहती हैं।

ये प्रतीक हैं — सफाई, शुद्धता और रोग निवारण के।

🌿 पूजा का महत्व

– माना जाता है कि शीतला माता की पूजा से रोगों से मुक्ति मिलती है।
– ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इनकी विशेष मान्यता है।
– गर्मी के मौसम में इनकी पूजा अधिक होती है।

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🍛 शीतला माता और ‘बासी भोजन’ परंपरा

– शीतला अष्टमी/सप्तमी पर ठंडा (बासी) भोजन चढ़ाया जाता है।

– मान्यता है कि इससे शरीर को ठंडक मिलती है और रोग दूर रहते हैं

📿 कब मनाया जाता है पर्व  ?

– होली के बाद आने वाले सप्ताह में शीतला अष्टमी मनाई जाती है।
– अलग-अलग राज्यों में तिथि में थोड़ा अंतर हो सकता है

धार्मिक और सामाजिक महत्व

शीतला माता की पूजा सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है।

ऐसे आयोजन लोगों को एकजुट करते हैं और पारंपरिक मान्यताओं को जीवित रखते हैं।

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