मध्य प्रदेश सरकार की लाड़ली बहना योजना में बड़ा बदलाव सामने आया है। ढाई साल के भीतर साढ़े पांच लाख से ज्यादा महिलाओं के नाम योजना से हट गए हैं। वहीं अब इस योजना में सिर्फ 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार महिलाएं ही पात्र बची हैं। फिलहाल योजना में नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं। इसके उलट, उम्र और अन्य शर्तों के आधार पर पुराने नाम लगातार कट रहे हैं। यही वजह है कि लाभार्थियों की संख्या हर साल बढ़ने की बजाय घटी है।
लाड़ली बहना योजना में बड़ा बदलाव क्यों?
मध्य प्रदेश सरकार की लाड़ली बहना योजना में बड़ा बदलाव सामने आया है। ढाई साल के भीतर साढ़े पांच लाख से ज्यादा महिलाओं के नाम योजना से हट गए हैं। वहीं अब इस योजना में सिर्फ 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार महिलाएं ही पात्र बची हैं।
फिलहाल योजना में नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं। इसके उलट, उम्र और अन्य शर्तों के आधार पर पुराने नाम लगातार कट रहे हैं। यही वजह है कि लाभार्थियों की संख्या हर साल बढ़ने की बजाय घटी है।
क्यों हो रहे हैं नाम हट?
इंदौर जिले में शुरुआत में 4 लाख 57 हजार 742 महिलाओं ने आवेदन किया था। वहीं अब सिर्फ 4 लाख 38 हजार 88 महिलाओं के खातों में ही हर महीने राशि पहुंच रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा का कहना है कि, तय मापदंडों के तहत पात्र महिलाओं को लगातार लाभ दिया जा रहा है। जो महिलाएं शर्तों से बाहर हो रही हैं, सिर्फ उन्हीं के नाम हटाए जा रहे हैं।
लाड़ली बहना योजना के नियमों में क्या है बदलाव?
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023 के नियमों में एक शर्त है। इस शर्त के मुताबिक यदि परिवार के किसी भी सदस्य को किसी सरकारी योजना से 1500 रुपए या उससे ज्यादा मिल रहे हैं, तो वह महिला इस योजना के लिए अपात्र होगी।
आहार अनुदान योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने पैसा दिया जाता है। शुरुआत में यह राशि 1000 रुपए थी। बाद में इसे बढ़ाकर 1500 रुपए प्रति माह कर दिया गया। अब यही राशि इन महिलाओं के लिए मुसीबत बन गई है।
- लाड़ली बहना योजना में सिर्फ 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार महिलाएं ही पात्र बची हैं।
- इंदौर जिले में अब सिर्फ 4 लाख 38 हजार 88 महिलाओं के खातों में ही हर महीने राशि पहुंच रही है।
- आहार अनुदान योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने 1500 रुपए मिल रहे हैं।
क्या होगा आगे?
फिलहाल योजना में नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं। इसके उलट, उम्र और अन्य शर्तों के आधार पर पुराने नाम लगातार कट रहे हैं। यही वजह है कि लाभार्थियों की संख्या हर साल बढ़ने की बजाय घटी है।
यही वजह है कि लाभार्थियों की संख्या हर साल बढ़ने की बजाय घटी है।