सावन के पवित्र महीने में मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध उज्जैन महाकाल मंदिर पूरी तरह सज चुका है। यहां रोज सुबह होने वाली बाबा महाकालभस्म आरती का दृश्य अद्भुत होता है। भस्म आरती में शामिल होने दूर-दूर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। बाबा महाकाल के दर्शन पाकर भक्त खुद को धन्य मानते हैं। सावन महीने की शुरुआत आज 30 जुलाई से हो चुका है। इसका समापन 28 अगस्त को पूर्णिमा के दिन होगा। इस दौरान मंदिर के खुलने के समय में बदलाव किया गया है। अब रोज तड़के 3:00 बजे मंदिर के पट खोल दिए जाएंगे।
महाकाल मंदिर की विशेषता
महाकाल मंदिर में सावन के दौरान विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर प्रशासन ने भक्तों के लिए खास व्यवस्था की है।
महाकाल मंदिर के कपाट खोले गए। परंपरा के मुताबिक, सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर आज्ञा ली गई। गर्भगृह के चांदी के द्वार खोले गए। पुजारियों ने बाबा महाकाल का पुराना श्रृंगार उतारकर कर्पूर आरती की।
भस्म आरती का महत्व
भस्म आरती में शामिल होने दूर-दूर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। बाबा महाकाल के दर्शन पाकर भक्त खुद को धन्य मानते हैं।
भस्म आरती के दौरान भगवान का जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और ताजे फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद भांग, चंदन, सिंदूर, चांदी के शेषनाग मुकुट, मुंडमाला और ताजे फूलों से बाबा का राजा स्वरूप में दिव्य श्रृंगार हुआ।
महाकाल मंदिर की सवारी
सावन और भादौ के महीनों में बाबा (उज्जैन महाकाल सवारी) नगर भ्रमण पर निकलते हैं। वे अपनी प्रजा का हालचाल जानने शहर में घूमते हैं।
इस बार सावन के चार और भादौ के दो सोमवार पड़ेंगे। बाबा की पहली सवारी 3 अगस्त को निकाली जाएगी। वहीं अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर को निकाली जाएगी। महाकाल मंदिर की खबरें के लिए हमारे साथ जुड़ें।
महाकाल मंदिर के दर्शन
सावन में रोज करीब 4 लाख भक्तों के आने का अनुमान है। इसे देखते हुए दर्शन के लिए नई व्यवस्था की गई है। आम भक्तों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
महाकाल मंदिर के दर्शन पाकर भक्त खुद को धन्य मानते हैं। महाकाल मंदिर की जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़ें। सावन महीने की खबरें के लिए हमारे साथ जुड़ें।