Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की 5 लाख आदिवासी महिलाएं को नहीं मिली पात्रता, जानिए वजह!

मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना में सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय की करीब 5 लाख महिलाओं को लाभ नहीं मिल रहा। जानिए इसके पीछे पात्रता नियम और सरकार का तर्क।

मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा में है। इस बार विवाद की वजह राज्य की सहरिया, बैगा और भारिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) की महिलाएं हैं। इन समुदायों की करीब 5 लाख महिलाएं लाड़ली बहना योजना का लाभ नहीं ले पा रही हैं। इसकी वजह सरकार द्वारा पहले से संचालित आहार अनुदान योजना है, जिसके तहत इन महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जा रही है।

क्यों नहीं मिल रहा लाड़ली बहना योजना का लाभ?

मध्य प्रदेश में सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय को Particularly Vulnerable Tribal Groups (PVTG) की श्रेणी में रखा गया है। इन समुदायों में लंबे समय से कुपोषण की समस्या को देखते हुए राज्य सरकार के जनजातीय कार्य विभाग ने वर्ष 2017 में आहार अनुदान योजना शुरू की थी।

इस योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया को शुरुआत में 1,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे। बाद में इस राशि को बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया।

सरकार का तर्क है कि चूंकि इन महिलाओं को पहले से ही हर महीने 1,500 रुपये की सहायता मिल रही है, इसलिए उन्हें लाड़ली बहना योजना के तहत अलग से आर्थिक सहायता नहीं दी जा सकती।

पात्रता नियम में क्या है प्रावधान?

सरकार के अनुसार, लाड़ली बहना योजना के पात्रता नियमों के पैरा 4.4 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी महिला को किसी अन्य सरकारी योजना के तहत निर्धारित सीमा के अनुसार नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, तो वह लाड़ली बहना योजना की पात्र नहीं होगी।

महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि यही नियम सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय की महिलाओं पर भी लागू किया गया है। सरकार का दावा है कि पात्रता के नियम सभी हितग्राहियों के लिए समान हैं और किसी भी वर्ग के साथ अलग व्यवहार नहीं किया गया है।

क्यों उठ रहे हैं सवाल?

इस मामले पर सामाजिक संगठनों और जनजातीय अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि आहार अनुदान योजना का उद्देश्य कुपोषण से लड़ना है, जबकि लाड़ली बहना योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई थी। ऐसे में दोनों योजनाओं के उद्देश्य अलग होने के बावजूद विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को लाड़ली बहना योजना से वंचित रखना उचित नहीं माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार यदि इन समुदायों के लिए अलग व्यवस्था करती है, तो इससे सबसे कमजोर वर्ग की महिलाओं को अतिरिक्त आर्थिक सहयोग मिल सकता है।

मुख्य बातें

  • मध्य प्रदेश की करीब 5 लाख PVTG महिलाओं को लाड़ली बहना योजना का लाभ नहीं मिल रहा।
  • प्रभावित समुदायों में सहरिया, बैगा और भारिया शामिल हैं।
  • इन महिलाओं को आहार अनुदान योजना के तहत 1,500 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।
  • सरकार ने लाड़ली बहना योजना के पैरा 4.4 का हवाला देते हुए उन्हें अपात्र बताया है।
  • मामले को लेकर सामाजिक संगठनों और जनजातीय अधिकार कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं।