मध्य प्रदेश के मंदिरों में दान की खुली पोल: महाकाल में हिसाब नहीं, ओंकारेश्वर में कमाई पर पर्दा!

मध्य प्रदेश के बड़े मंदिरों में दान की गिनती के लिए खास इंतजाम हैं। परिसर में एक पारदर्शी गिनती कक्ष बना है। यहां बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाती है।

मध्य प्रदेश के मंदिरों में दान की खुली पोल सामने आई है। महाकाल में दान की गिनती के लिए खास इंतजाम हैं, लेकिन ओंकारेश्वर में कमाई पर पर्दा है। दान पेटियों का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है, और ऑनलाइन दान, प्रसाद और लड्डू बिक्री का हिसाब अब भी सार्वजनिक नहीं है। मंदिर से जुड़े लोग लंबे समय से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। आरोप है कि गिनती में बड़े नोट कम निकलते हैं। पहले भी दान पेटी से पैसे निकालने के वीडियो वायरल हुए थे, लेकिन व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।

मध्य प्रदेश के मंदिरों में दान की गिनती के लिए खास इंतजाम

उज्जैन के महाकाल मंदिर में दान की गिनती के लिए खास इंतजाम है। परिसर में एक पारदर्शी गिनती कक्ष बना है। यहां बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाती है।

महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष पहलवाड़िया का कहना है कि रोज दान की गिनती होती है। उनके मुताबिक पूरी प्रक्रिया तीन स्तर की सुरक्षा में होती है।

ओंकारेश्वर में कमाई पर पर्दा

ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार दान पेटियों का आंकड़ा सार्वजनिक किया है। नौ जुलाई को बताया गया कि एक हफ्ते में 24 लाख 41 हजार रुपए दान मिला। यहां हर मंगलवार और शुक्रवार को दान पेटियां खोली जाती हैं।

वहीं, ऑनलाइन दान, प्रसाद और लड्डू बिक्री का हिसाब अब भी सार्वजनिक नहीं है। शीघ्र दर्शन के लिए हर श्रद्धालु से 300 रुपए लिए जाते हैं। रोज छह हजार लोगों को यह सुविधा मिलती है। इस आय का भी कोई ब्योरा जनता के सामने नहीं आता।

मंदिर प्रशासन दान सुरक्षित होने का दावा

मंदिर प्रशासन दान सुरक्षित होने का दावा करता है। लेकिन न वजन बताया जाता है, न बाजार भाव के हिसाब से कीमत। यही पारदर्शिता की कमी का मुख्य कारण है।

उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि तीन साल पहले सोना-चांदी की फिजिकल जांच की बात हुई थी। वहीं, अब तक यह जांच नहीं हो पाई।

  • महाकाल मंदिर में दान की गिनती के लिए खास इंतजाम है।
  • ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार दान पेटियों का आंकड़ा सार्वजनिक किया है।
  • मंदिर प्रशासन दान सुरक्षित होने का दावा करता है, लेकिन पारदर्शिता की कमी का मुख्य कारण है।