बुधनी में बिजली पोल को लेकर विवाद, नागरिकों ने उठाए प्रक्रिया और जनहित से जुड़े सवाल

बुधनी में शासकीय भूमि पर दशकों पुराने बिजली पोल को हटाने की तैयारी विवाद का कारण बन गई है। स्थानीय लोगों ने पारदर्शिता, जनहित, लंबित विद्युत कार्यों और भूमि की स्थिति की जांच की मांग की है।

कन्हैया नाथ, बुधनी

बुधनी नगर के वार्ड क्रमांक-10 स्थित झंडा चौक एवं नर्मदा घाट क्षेत्र में शासकीय भूमि पर वर्ष 1963 से स्थापित एक विद्युत पोल को हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने इस मामले में पारदर्शिता, जनहित और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

24 घंटे में कार्रवाई की तैयारी पर सवाल

जानकारी के अनुसार एक परिवार ने अपने मकान के सामने स्थित विद्युत पोल को अपने खर्च पर अन्यत्र स्थानांतरित कराने के लिए बिजली विभाग में आवेदन दिया है। आवेदन के बाद विभागीय अमले द्वारा नए स्थान पर पोल लगाने की तैयारी और सड़क की खुदाई शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आवेदन के बाद कम समय में कार्रवाई शुरू होने से कई सवाल उठ रहे हैं, विशेषकर तब जबकि क्षेत्र में लंबे समय से लंबित विद्युत संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।

जनहित बनाम निजी आवश्यकता की बहस

क्षेत्रवासियों का कहना है कि संबंधित पोल से आसपास के कई घरों की विद्युत आपूर्ति जुड़ी हुई है। पोल के आसपास नगर परिषद द्वारा सीसी सड़क का निर्माण भी कराया गया है। ऐसे में पोल हटाए जाने से विद्युत व्यवस्था, यातायात और सार्वजनिक उपयोगिता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

कुछ नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि शासकीय भूमि पर स्थापित पुराने पोलों को निजी आवेदनों के आधार पर स्थानांतरित किया जाता है, तो इससे भविष्य में सार्वजनिक स्थलों के उपयोग और अतिक्रमण संबंधी विवाद बढ़ सकते हैं।

लंबित भूमिगत केबल का भी उठा मुद्दा

बताया जाता है कि नगर के बुधनी घाट, माझी मोहल्ला और ग्वालटोली क्षेत्र में खुले विद्युत तारों को भूमिगत केबल में बदलने की मांग लंबे समय से हो रही है,लेकिन यह कार्य कई वर्षों से लंबित है, जबकि खुले तारों के कारण स्पार्किंग और जानवरों के करंट की चपेट में आने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

नागरिकों का कहना है कि जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और निजी आवेदनों पर की जा रही त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जानी चाहिए।

अतिक्रमण और सामाजिक आस्था से जुड़े दावे

क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि संबंधित भूमि के आसपास पूर्व में अतिक्रमण संबंधी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। वहीं कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया है कि क्षेत्र में आदिवासी समाज का एक पारंपरिक देवस्थल मौजूद है, जहां वर्षों से धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं। समाज के कुछ प्रतिनिधि इस परंपरा को पुनर्जीवित करने और भूमि की स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।

नागरिकों की प्रमुख मांगें

  • पोल स्थानांतरण से पहले भूमि एवं स्वामित्व की जांच हो।

  • खुले तारों को हटाकर भूमिगत केबल बिछाई जाए।

  • जनहित से जुड़े लंबित कार्यों को प्राथमिकता मिले।

  • किसी भी कार्रवाई से पहले स्थानीय लोगों की आपत्तियों का परीक्षण किया जाए।

बिजली विभाग का पक्ष

बिजली विभाग के कनिष्ठ यंत्री ने बताया कि संबंधित व्यक्ति ने अपने खर्च पर विद्युत पोल स्थानांतरित करने के लिए आवेदन दिया है। यदि किसी नागरिक को आपत्ति है तो भूमि की स्थिति, अभिलेखों और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी तथा नियमानुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और किसी भी निर्णय से पहले सार्वजनिक हित, विद्युत सुरक्षा तथा भूमि की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया जाए।