केरल का 2026-27 पहला बजट: वी.डी. सतीशन ने वित्तीय संकट में नई दिशा

उद्घाटन समारोह से लेकर विस्तृत वित्तीय आँकड़ों तक, इस लेख में हम केरल के यूडीएफ सरकार के पहले बजट की गहरी जाँच करेंगे, जिसमें ऋण‑भार, खर्च‑प्राथमिकताएँ और विकास‑नीति की प्रमुख बातें शामिल हैं।

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केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए यूडीएफ सरकार का पहला बजट विधायिका में पेश किया, जो राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है। इस बजट में कुल सार्वजनिक ऋण 5.07 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, जबकि 77% राजस्व वेतन, पेंशन और ब्याज जैसी प्रतिबद्ध खर्चों में खर्च हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, केरल का पूँजी खर्च केवल 1.3% जीएसडीपी का है, जो देश में सबसे कम स्तरों में से एक है। साथ ही, राज्य ने 2025 में 262 दिन वेज एंड मीन्स एडवांस पर निर्भरता और 84 दिन ओवरड्राफ्ट का सामना किया। इन आँकड़ों के प्रकाश में, सतीशन ने विकास‑उन्मुख नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया और आगामी आर्थिक चुनौतियों के समाधान के लिए रणनीतिक कदमों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

उद्घाटन समारोह और बजट प्रस्तुति की प्रमुख झलकियाँ

बजट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया

वित्त पोर्टफोलियो संभालते हुए मुख्यमंत्री सतीशन ने थिरुवनंतपुरम के विधान सभा में बजट का विस्तृत दस्तावेज़ पेश किया, जहाँ प्रिंटिंग विभाग ने आधिकारिक निवास पर कागजी प्रतियां पहुंचाई। अतिरिक्त मुख्य सचिव के.आर. ज्योतिलाल ने प्री‑बजट औपचारिकता के तहत इन दस्तावेज़ों को मुख्यमंत्री के घर पर सौंपा, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रकाश पड़ा।

मुख्य वक्तव्य और वित्तीय पोर्टफोलियो

वित्त मंत्री के रूप में सतीशन ने कहा कि नई सरकार को एक गंभीर वित्तीय संकट विरासत में मिला है, परन्तु यह बजट विकास‑उन्मुख निवेश और सामाजिक सुरक्षा को संतुलित करने का प्रयास है। उन्होंने ऋण‑भार को नियंत्रित करने, राजस्व‑व्यय अनुपात को सुधारने और पूँजी खर्च को धीरे‑धीरे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

वित्तीय स्वास्थ्य की पृष्ठभूमि: कर्ज और खर्च की वास्तविकता

सार्वजनिक ऋण की बढ़ती बोझ

केरल की सार्वजनिक ऋण सीमा 5.07 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गई है, जो राज्य के कुल राजस्व का एक बड़ा हिस्सा है। इस ऋण में कई वर्षों के अधिशेष, विकास परियोजनाओं के लिए उधार और मौजूदा दायित्वों का मिश्रण शामिल है, जिससे वित्तीय लचीलापन घट रहा है।

राजस्व का 77% प्रतिबद्ध खर्चों में

राज्य की आय का 77 प्रतिशत वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे अनिवार्य खर्चों में खर्च हो रहा है, जिससे विकासात्मक योजनाओं के लिए उपलब्ध फंड सीमित हो रहा है। इस संरचना के कारण केरल का पूँजी खर्च केवल 1.3% जीएसडीपी पर ही टिक पाया है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है।

बजट के प्रमुख आँकड़े और आर्थिक संकेतक

उपरोक्त आँकड़ों को देखते हुए, बजट ने कई प्रमुख संकेतक प्रस्तुत किए हैं जो राज्य की आर्थिक दिशा को निर्धारित करेंगे।

  • कुल सार्वजनिक ऋण: 5.07 लाख करोड़ रुपये, जो पिछले वर्ष से 8% अधिक है और वित्तीय स्थिरता को चुनौती देता है।
  • प्रतिबद्ध व्यय अनुपात: 77%, जिससे विकासात्मक खर्चों के लिए केवल 23% राजस्व शेष रहता है।
  • पूँजी खर्च अनुपात: 1.3% जीएसडीपी, जो भारत के औसत 3.5% से काफी कम है, इस पर सरकार ने सुधार की योजना घोषित की है।

जनमत, नीति प्रभाव और भविष्य की राह

जनसंख्या की प्रतिक्रिया और अपेक्षाएँ

केरल के नागरिकों ने बजट पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है; जबकि सामाजिक सुरक्षा लाभों में वृद्धि को सराहा गया, विकासात्मक निवेश की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की गई। कई नागरिकों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे में अधिक फंड की माँग की है।

लंबी अवधि की वित्तीय रणनीति

सरकार ने अगले पाँच वर्षों में ऋण‑भार को 5% तक घटाने, पूँजी खर्च को 2.5% जीएसडीपी तक ले जाने और राजस्व‑व्यय संतुलन को सुधारने के लिए एक व्यापक योजना पेश की है। इस रणनीति में निजी‑क्षेत्र साझेदारी, कर सुधार और डिजिटल वित्तीय प्रबंधन को प्रमुख साधन माना गया है।