भोपाल से देवबंद तक फैली जांच की कड़ियां: ATS के रडार पर संदिग्ध नेटवर्क, खंगाले जा रहे डिजिटल सबूत

भोपाल से गिरफ्तार फराज और उसके सहयोगी की गिरफ्तारी के बाद ATS सोशल मीडिया गतिविधियों, संपर्कों, मोबाइल डेटा और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच कर रही है। एजेंसियां संभावित नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की पहचान में जुटी हैं।

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भोपाल।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के काजी कैंप से गिरफ्तार मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह से पूछताछ के बाद जांच एजेंसियां अब उसके कथित नेटवर्क की परतें खोलने में जुट गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, जांच का फोकस सोशल मीडिया के जरिए बनाए गए संपर्कों, डिजिटल गतिविधियों और संभावित नेटवर्क विस्तार पर है।

ATS यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में था और उसकी गतिविधियों का दायरा कितना व्यापक था।

देवबंद कनेक्शन से जांच को नई दिशा

फराज की निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के देवबंद से नईम अब्दुल्ला की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।

एजेंसियों का मानना है कि दोनों के बीच लंबे समय से संपर्क था और इसी कड़ी के जरिए कुछ अन्य लोगों तक पहुंच बनाई गई। दोनों आरोपियों को अदालत ने 16 जून तक रिमांड पर भेजा है।

डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही एजेंसियां

जांचकर्ताओं ने फराज का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।

टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसकी सक्रियता की पड़ताल की जा रही है।

एजेंसियां चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, संपर्क सूची और साझा की गई सामग्री का विश्लेषण कर रही हैं, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान हो सके।

गरीब और युवाओं तक पहुंच बनाने की आशंका

एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर और बेरोजगार युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा था। सूत्रों का कहना है कि इस पहलू को भी गंभीरता से जांचा जा रहा है।

विदेशी फंडिंग और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच

ATS आरोपी के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं किसी बाहरी स्रोत से धनराशि तो प्राप्त नहीं हुई। इसके लिए बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण किया जा रहा है।

क्लीनिक, ट्यूशन और सामाजिक दायरे की भी पड़ताल

फराज जिस क्लीनिक में काम करता था, उसके साथ-साथ उसके सामाजिक और पेशेवर संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

पड़ोसियों और परिचितों से पूछताछ कर उसकी दिनचर्या, गतिविधियों और संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल

फिलहाल जांच का प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपी की गतिविधियां व्यक्तिगत स्तर तक सीमित थीं या फिर उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

डिजिटल डेटा और पूछताछ से मिलने वाले इनपुट के आधार पर आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।