नई दिल्ली में राहुल गांधी ने ट्विटर (X) पर एक तीखा बयान दिया, जिसमें उन्होंने भाजपा‑इलेक्शन कमीशन (EC) के बीच ‘जुगलबंदी’ को ‘सीट चोरी’ का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस की राजसभा उम्मीदवार मीनााक्षी नटराजन के नामांकन रद्दीकरण को एक पक्षपाती कदम बताया और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा कहा। साथ ही झारखंड के भाजपा‑समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार परिमल नाथवानी को मिली विशेष छूट को भी उन्होंने उजागर किया, जिससे चुनाव आयोग की दोहरी मानक पर सवाल उठे। यह टिप्पणी राजसभा द्विवार्षिक चुनावों के प्रारंभिक चरण में ही राजनीतिक तनाव को बढ़ा रही है। अंत में, राहुल ने कहा कि भाजपा के लिए चुनाव जीतना आसान है, जबकि प्रक्रिया को बदलना कठिन।
After Vote Chori and Sarkar Chori – the BJP-EC jugalbandi has finished the contest before it has even begun with Seat Chori.
Look at what happened in the recent Rajya Sabha elections.
Congress candidate Meenakshi Natarajan ji submitted every document. No pending cases. The EC…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 11, 2026
राज्यसभा चुनाव में BJP‑EC के गठबंधन की नई तंज़: राहुल गांधी की तीखी टिप्पणी
मीनााक्षी नटराजन की नामांकन रद्दीकरण पर आरोप
राहुल गांधी ने बताया कि मीनााक्षी नटराजन ने सभी आवश्यक दस्तावेज़ जमा कर दिए थे, कोई बकाया केस नहीं था, फिर भी भाजपा की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने बिना किसी सुनवाई के उनका नामांकन रद्द कर दिया। यह कदम कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना गया, क्योंकि नटराजन मध्य प्रदेश से कांग्रेस की प्रमुख उम्मीदवार थीं।
झारखंड के परिमल नाथवानी को मिली विशेष छूट
वहीं, झारखंड से भाजपा‑समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने फॉर्म में अपना नाम गलत लिखा और कई अनिवार्य खुलासे छोड़े, फिर भी चुनाव आयोग ने उन्हें सुधार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया। गांधी ने इसे ‘भ्रष्टाचार की दोहरी मानक’ कहा, जहाँ एक पक्ष को सजा और दूसरे को सौगात मिलती है।
नामांकन प्रक्रिया में असमानता: चुनाव आयोग की दोहरी मानक
भ्रष्टाचार के संकेत: वोट चोरी से लेकर सीट चोरी तक
गांधी ने ‘वोट चोरी’ और ‘सर्कर चोरी’ के बाद अब ‘सीट चोरी’ का उल्लेख किया, यह दर्शाता है कि चुनाव प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनुचित हस्तक्षेप हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी जुगलबंदी लोकतंत्र की नींव को कमजोर करती है और जनता का भरोसा घटाती है।
ऐतिहासिक तुलना: पिछले राजसभा चुनावों में समान विवाद
पिछले कुछ वर्षों में भी राजसभा चुनावों में कई बार नामांकन रद्दीकरण, फॉर्म त्रुटियों पर छूट और पक्षपाती निर्णय देखे गए हैं। इस बार का मामला विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि यह सीधे कांग्रेस के प्रमुख नेता द्वारा सार्वजनिक रूप से उजागर किया गया है, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
राज्यसभा चुनाव के आँकड़े और संभावित परिणाम
नामांकन रद्दीकरण के बाद मध्य प्रदेश से सभी तीन भाजपा उम्मीदवार—तरुण चुघ, राजनिश अग्रवाल और महेश केवट—बिना प्रतिद्वंद्वी के राजसभा में प्रवेश करने को तैयार हैं, जिससे भाजपा को बड़ी संख्या में सीटें मिलने की संभावना है।
- कांग्रेस की सीटें: मीनााक्षी नटराजन के रद्दीकरण के कारण कांग्रेस को इस चरण में कोई सीट नहीं मिली।
- भाजपा की संभावित जीत: तीन निर्वाचित उम्मीदवारों को बिना विरोध के प्रवेश मिलने से भाजपा को लगभग 75% सीटें मिल सकती हैं।
- जुड़ाव का प्रभाव: इस निर्णय से आगामी राज्य‑स्तर के चुनावों में भाजपा की स्थिति मजबूत हो सकती है, जबकि विपक्षी दलों को रणनीति पुनः विचारनी पड़ेगी।
जनमत और नीति पर प्रभाव: भविष्य की दिशा
जनता की प्रतिक्रिया और विरोध प्रदर्शन
सोशल मीडिया पर जनता ने इस निर्णय को ‘न्यायहीन’ और ‘भ्रष्ट’ कहकर निंदा की, कई शहरों में छोटे‑छोटे प्रदर्शन हुए जहाँ नागरिकों ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता की मांग की। यह प्रतिक्रिया कांग्रेस को पुनः ऊर्जा प्रदान कर सकती है।
आगामी चुनावी रणनीति और संभावित बदलाव
भाजपा को अब अपनी जीत को स्थायी बनाने के लिए नीतिगत सुधारों और गठबंधन रणनीतियों को मजबूत करना होगा, जबकि कांग्रेस को इस ‘सीट चोरी’ को अदालत में चुनौती देते हुए सार्वजनिक समर्थन जुटाना होगा। दोनों पक्षों के लिए यह एक निर्णायक मोड़ है, जहाँ न्यायिक प्रक्रिया और जनसमर्थन दोनों ही भविष्य की दिशा तय करेंगे।















