राज्यसभा चुनाव में ‘दो तस्वीरें’: झारखंड में राहत, एमपी में खारिजी

राज्यसभा चुनाव के दौरान झारखंड और मध्य प्रदेश में नामांकन को लेकर अलग-अलग फैसलों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। झारखंड में निर्दलीय उम्मीदवार को त्रुटियां सुधारने का अवसर मिला, जबकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया गया।

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भोपाल/नई दिल्ली।

देश के 12 राज्यों में राज्यसभा की 26 सीटों के लिए हो रहे चुनावों के बीच मध्य प्रदेश और झारखंड से सामने आए दो घटनाक्रम राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं।

एक ओर झारखंड में भाजपा समर्थित माने जाने वाले निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी को नामांकन पत्र की कथित त्रुटियां सुधारने का अवसर मिला।

वहीं, मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन एक जानकारी छूट जाने के आधार पर निरस्त कर दिया गया। इन दोनों मामलों ने चुनावी प्रक्रिया में समान मानदंडों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

झारखंड में आपत्ति के बाद मिला सुधार का अवसर

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि झारखंड में राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नथवानी के नामांकन पत्र और शपथपत्र में कुछ त्रुटियां थीं, जिन पर स्क्रूटनी के दौरान आपत्ति दर्ज कराई गई।

पार्टी नेताओं का दावा है कि इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें आवश्यक सुधार का अवसर दिया और संशोधित दस्तावेज स्वीकार करते हुए नामांकन वैध माना गया। कांग्रेस का कहना है कि स्क्रूटनी के बाद नए दस्तावेज स्वीकार करना नियमों की भावना के विपरीत है।

 

कौन है परिमल नथवानी ?
परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं । नथवानी ने 2010-2019 के दौरान गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है।

वे गुजरात पेटकोक एंड पेट्रोप्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री द्वारकाधीश साल्ट वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं।

वे 2020 के राज्यसभा चुनावों से आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद का प्रतिनिधित्व करते हैं, इससे पहले वे 2008-2020 तक झारखंड से राज्यसभा सांसद के रूप में कार्यरत थे ।

 

मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन का पर्चा निरस्त

दूसरी ओर मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उन्होंने अपने हलफनामे में न्यायालय से जुड़े एक प्रकरण का उल्लेख नहीं किया था।

कांग्रेस का तर्क है कि यह कोई लंबित आपराधिक मामला नहीं, बल्कि एक न्यायिक नोटिस से जुड़ा विषय था, इसलिए इसका उल्लेख अनिवार्य नहीं था।

पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि झारखंड में उम्मीदवार को त्रुटि सुधारने का अवसर दिया जा सकता है तो मध्य प्रदेश में भी समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए था।

‘एक जैसे मामलों में अलग फैसले क्यों?’

कांग्रेस अब इस विवाद को केवल एक उम्मीदवार के नामांकन तक सीमित नहीं मान रही है। पार्टी का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में समान प्रकृति के मामलों पर अलग-अलग निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और एकरूपता को लेकर सवाल खड़े करते हैं। इसी आधार पर कांग्रेस “एक चुनाव, दो पैमाने” का मुद्दा उठा रही है।

राजनीतिक विवाद से संवैधानिक बहस तक

मीनाक्षी नटराजन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। हालांकि,समय रहते याचिका दायर होने के बावजूद,गुरुवार को सुनवाई नहीं होने पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल उठाए, जबकि मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने न्यायिक प्रक्रिया में देरी को लेकर प्रश्न खड़े किए। कांग्रेस और उसकी छात्र इकाइयां भी विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं।

 

बता दें कि गुरुवार को चुनाव के लिए जमा नामांकन फॉर्म वापस लिए जाने की अंति​म तिथि रही। मप्र में कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन निरस्त होने पर यहां रिक्त तीन सीटों के लिए सिर्फ तीन उम्मीदवार ही मैदान में रहने से निर्वाचन अधिकारी ने इन्हें निर्विरोध निर्वाचित कर दिया।

हालांकि मामला अभी खत्म नहीं हुआ। चुनाव में रुचि रखने वालों की नजर सुप्रीम कोर्ट में कल होने वाली सुनवाई पर है। फैसला यदि कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में आया तो पांसा पलट भी सकता है।