सीहोर जिले की नगर परिषद बुधनी क्षेत्र में चल रहे जनगणना कार्य में लापरवाही का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया।
वार्ड क्रमांक 10 बुधनी घाट निवासी पूर्व पार्षद श्रीमती कंचन शर्मा की शिकायत के बाद मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं जनगणना चार्ज अधिकारी संतोष रघुवंशी स्वयं टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच की।
कांग्रेस,बीजेपी वाली मानसिकता !
सूत्रों का दावा है कि जनगणना में भी कांग्रेस,बीजेपी वाली मानसिकता काम कर रही है। मौके पर जांच के दौरान जनगणना रिकॉर्ड से जुड़ी कई त्रुटियां सामने आईं।
इसके बाद तत्काल सुधार की कार्रवाई करते हुए मकानों पर दोबारा नंबर अंकित कराए गए और गलत प्रविष्टियों को ठीक किया गया।
मनमाफिक जानकारी दर्ज करने का आरोप
पूर्व पार्षद श्रीमती कंचन शर्मा ने शिकायत में आरोप लगाया था कि उनके परिवार की जनगणना प्रक्रिया नियम अनुसार नहीं की गई।
उनसे निर्धारित जानकारी और जनगणना से जुड़े जरूरी सवाल नहीं पूछे गए। साथ ही मकान नंबर और पारिवारिक जानकारी दर्ज करने में भी गड़बड़ी की गई।
शिकायत के बाद जनगणना चार्ज अधिकारी संतोष रघुवंशी ने संबंधित पर्यवेक्षक रमेश मालवीय और वार्ड क्रमांक 10 की प्रगणक एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सीनू शर्मा को दो दिवस में पुनः निरीक्षण कर प्रतिवेदन देने के निर्देश दिए।
मौके पर पहुंची टीम, डेढ़ घंटे चली जांच
निर्देश के बाद सीएमओ संतोष रघुवंशी, पर्यवेक्षक रमेश मालवीय, जनगणना प्रभारी नीरज , नगर परिषद कर्मचारी इमरान खान, गौरव यादव, सोनू माझी और प्रगणक सीनू शर्मा मौके पर पहुंचे।
टीम ने लगभग डेढ़ घंटे तक रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति का मिलान किया।
जांच में सामने आया कि जिस हिस्से में श्रीमती कंचन शर्मा का परिवार रहता है, वहां परिवार के चार सदस्य हैं, जबकि प्रविष्टि में पांच सदस्य दर्ज कर दिए गए थे।
बताया गया कि यह त्रुटि मौके पर अधिकारियों और मौजूद लोगों के सामने स्वीकार की गई, जिसके बाद सुधार किया गया।
बिना अनुमति दूसरे व्यक्ति का नाम जोड़ने पर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल राम शर्मा का नाम दूसरे परिवार में जोड़े जाने को लेकर उठा। आरोप है कि न तो संबंधित व्यक्ति से जानकारी ली गई और न ही परिवार से इसकी पुष्टि की गई।
राम शर्मा ने भी आपत्ति जताते हुए कहा कि जनगणना अवधि में उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया और न ही निर्धारित जानकारी ली गई। उन्होंने कहा कि उनके मकान पर अलग-अलग नंबर लिखे मिले, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। हालांकि, दोनों ही परिवार के सदस्य आपस में निकट संबंधी हैं।
छूटे मकानों पर दोबारा डाले गए नंबर
जांच के दौरान जिन मकानों पर नंबर अंकित नहीं थे या गलत नंबर थे, वहां दोबारा नंबर लिखे गए। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब मौके पर गलती सामने आ गई और सुधार करना पड़ा तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही है?
कार्रवाई की मांग, वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा मामला
पूर्व पार्षद श्रीमती कंचन शर्मा ने जिला जनगणना अधिकारी, जनगणना निदेशक कार्यालय नई दिल्ली और संबंधित अधिकारियों से मामले में जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
वहीं राम शर्मा ने भी पूरे मामले को वरिष्ठ अधिकारियों तक ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि जनगणना जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया में हर जानकारी प्रत्यक्ष सत्यापन के बाद ही दर्ज की जानी चाहिए।